पचइयाँ : दूध, दूब आ नेह के गंध - परिचय दास
पचइयाँ के दिन जब आँगन के गोबर लिपल धरती साँप के बरे सजावल जाला, त उ घरी गाँव के हावा में एगो गंध उठेला—माटी, दूध, गोबर, दूब आ आँच के। पचइयाँ...
पचइयाँ के दिन जब आँगन के गोबर लिपल धरती साँप के बरे सजावल जाला, त उ घरी गाँव के हावा में एगो गंध उठेला—माटी, दूध, गोबर, दूब आ आँच के। पचइयाँ...
आसवाँन तानल समियाना लागल झालर बदरा के कतहूँ करिया कतहूँ उज्जर टाँगल-टूँगल सरिया के। भोर के झूमर डगरा जइसन ललकी कीरिन छितरा के माथ पर आके चमक...
जहिया से अंखियन के दुनो बौल हो गइल फ्यूज। रास्ता चलत जपत चलीला प्लीज प्लीज एक्सक्यूज॥ प्लीज प्लीज एक्सक्यूज करत बस में चढ़नी अकुता के। तब ले...
कहऽ, कइसे के खुसिया मनाईं मितवा। कइसे खुसिया मनाईं मन के का हो समुझाईं घर में बाटे नाहीं दाना नाहीं मिले के ठेकाना का हो बेकतिन के अपना खिया...
झुरू झुरू पछुवा कड़ेर पुरवइया में, बाड़ा नीक लागेला टुटलकी मड़इया में। गोल गाल गुलवरी के लगे कोलूहाड़ी छवरी के ओर पार लउके उखियाड़ी, होखेला ...
काहें अइसन होला बाबा देखीं तनी पतराऽ काहें अइसन होला बाबा देखीं तनी पतराऽ। धोबिया से लोटा-थारी केहू ना छुआवे, कहिके अछोप सजी लोग निहिसावे। ब...
बहुत दिन बाद जब गइया से भेंट भउवे काल्ह दूहे के बेरा इयाद से झूरी झरि साफ लउके लगुए सभ! हाल चाल पूछतीं ओकर अउरी सुनइतीं कुछ बात आपन कि गोड़ छ...
सँझवत अप्रैल 2025, अंक - 8 संपादकीय जवन सचमुच अनुभव करीं, ऊहे लिखीं, बनावटी ना हमार पसंदीदा किताब बेटा के नइहर में घर के गूर भगवती प्रसाद द्...
अरे रामा झर झर बरसेला पनिया भिजेली मोर धनिया ए रामा। घनघोर घटा नभ छावे बदरिया चम चम चम चम चमके बिजुरिया आरे रामा नाचेला मोरवा मोरिनिया भिजेल...
बाते कुछ आउर बा... मेहर का पगार के चईत का जाड़ के घोड़ा का लतार के, बाते कुछ आउर बा। नाच में लबार के, ढ़ारे में धार के। माह में कुआर के, बात...
माई सिलबट्टा पर मरिचा, नून आ लहसुन के चटनी पिसत समुझवली- बाबू हो! अलग-अलग बा ए तीनू के स्वाद, आपन रूप, आपन रंग, आपन गुन, आपन बुनियाद। खाली म...
7. अनुवाद उहे, जे रच बस जाए एक महीना पहिले एक आदमी एगो प्रश्न पूछि के हमरा के अजीब पेशोपेश में डाल देले रहे। जइसे ‘थैंक्यू’ का प्रतिउत्तर मे...
(1) जब प्रेम के इजहार चले लागल तब नेह के सनसार चले लागल आदत जरे ओला के ढह गइल नदी में नाव के सवार चले लागल। ----------------- (2) एह बसंत के...
मुश्किल बा मन के समझावल आगे-पीछे दउड़ल-धावल आ/मुश्किल बा रुकल-थथमल चलत राह में अचके पंजरल। राह चलत जाईं अकेला मिले पत्थर भा/मिले ढेला जन करी...
आपै आपको जानते, आपै का सब खेल। पलटू सतगुरु के बिना, ब्रह्म से होय न मेल॥1॥ पलटू सुभ दिन सुभ घड़ी, याद पड़ै जब नाम। लगन महूरत झूठ सब, और बिगाड़ै...
मन के अँगना में एगो रंगीन सतरंगी चूनर लहरा गइल बा। बहे लागल बा बसंती बयार, जेहमें सोनपुर के मेलवा जइसन गंध बसल बा। धरती के आँचल में सरसों के...
सगुण के फेरा में निर्गुण ना भेंटाइल ना रामजी मिलले,ना कृष्ण कन्हाई फेरा कवनो चीज के ठीक ना ह ई सुनले रहीं बाकिर तोतवा दाल के फेर में जाल मे...
जिनगी के दुपहरिया खोजे जब-जब शीतल छाँव रे पास बोलावे गाँव रे आपन, पास बोलावे गाँव रे। गाँव के माटी, माई जइसन खींचे अपना ओरिया हर रस्ता, चौरा...
प्रेम एगो अइसन लड़िका जिनका पर घर परिवार के पूरा जिम्मेदारी रहे, ऊ अपना परिवार में बड़ रहले एहिसे उनका हर चीझु के ख्याल रखे के रहे,अपना परिवार...
4. जरूरी बा भोजपुरी के स्वाभिमान से जोड़ल ओइसे त बहुत पहिले से संविधान का आठवी अनुसूची में भोजपुरी के डलवावे के माङ भोजपुरिया करत बाड़न बाकिर ...