देवास - रसिक बिहारी ओझा 'निर्भीक'
रामनवमी के दिन रहे। शिव-लगन बो अहिरिन के, देवास लागल रहे। ऊ नहाइ धोयाइ के, नया लूगा झुला पहिर के, मूडी गडले बइठल रहली। माता मइया के, आवही के...
रामनवमी के दिन रहे। शिव-लगन बो अहिरिन के, देवास लागल रहे। ऊ नहाइ धोयाइ के, नया लूगा झुला पहिर के, मूडी गडले बइठल रहली। माता मइया के, आवही के...
डॉ० रसिक बिहारी ओझा “निर्भीक” जी आज हमनी के बीच नईखी बाक़ी उहा के रचना, भोजपुरी में उहा के उपस्थिति दिलावत रहेले. भोजपुरी साहित्य...
"भोजपुरी लोकधारा" श्री रसिक बिहारी ओझा 'निर्भीक' जी के लिखल भोजपुरी कऽ शोध आलेख कऽ किताब हऽ जेवना में एगारह गो शोध ल...
"भोजपुरी शब्दानुशासन" श्री रसिक बिहारी ओझा 'निर्भीक' जी के लिखल भोजपुरी कऽ व्याकरण कऽ किताब हऽ जेवना के निर्भीक जी ब...
भगवान के मूरति! नीमन बा एह जमाना में तूँ चुपचाप मंदिर में बइठल रहऽ टुकुर-टुकुर ताकत रहऽ घरी घंटा बाजत रहे जल ढरकत रहे भोग लागत रहे आ तूँ ...