बाँस के बहँगिया जोहत बाटे बटिया - विद्या शंकर विद्यार्थी

आवऽ आवऽ सँइया आवऽ बहरा से घरे
छठिया बरत तुहूँ करे,
भुईंया परी संझवत करे, अरघ देबे भिनसहरे, छठिया...।

मिलिजुल कइल जाई दुनहूँ परानी
पोखरा के तीथा लिपइले हम बानी
कद्दू परसाद भात नेवान पहिले करे, छठिया...।

बिसवत सुरूज देव के गोड़ लागल जाई
रतिया में दया करिहें देखिहऽ छठी माई
बोलिहें चुचुहिया खोंतवा में भिनसहरे, छठिया...।

कले कले पनिया में झलकी किरिनिया
तवने घरी अरघ परी सँवरी जिनगनिया
बड़ के आशीष लेबे छोट के नेह करे, छठिया...।

बाँस के बहँगिया जोहत बाटे बटिया
बाटे उदासल पिया गँउआ के मटिया
छठ के मलाल लेइके अँसुआ टघरे, छठिया....।
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लेखक परिचयः
नाम: विद्या शंकर विद्यार्थी
C/o डॉ नंद किशोर तिवारी
निराला साहित्य मंदिर बिजली शहीद
सासाराम जिला रोहतास (सासाराम )
बिहार - 221115
मो. न.: 7488674912

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