द्रौपदी - चन्द्रशेखर मिश्र

तू दुर्गा बनिके अईलू तोहरे बल वीर चलावत भाला।
माई सरस्वती तू बनलू तोहरी किरिपा कविता बनि जाला।
आठ भुजा नभचुम्बी धुजा नही मैहर मे सीढियाँ चढ़ी जाला।
राउर ऊची अदालत बा बदरा जह से रचिके रही जला।। १ ॥

नही ढोवात अन्हार क भार बा, ताकत बाटे ढोवाई न देते।
झंखत बाटी अजोर बदे दीयरी ढिबरी से छुवाई न देते।
भोर समै पछ्तईबे अकेलई राह अन्हारे देखाई न देते।
बाती अकेली कहाँ ले जरई तनिका भर नेह चुवाई न देते॥ २॥

देखले कबौ न बाटी पढ़ले जरूर बाटी सुनीले कि ऋषि मुनि झूठ नाही बोलेले।
ब्रम्हा बिसुन औ महेश तीनिउ मोहि गईले माई तोर बीन कौन कौन सुर खोलेले।
द्रौपदी बेचारी बाटे खाली एक साड़ी बाटे उहो न बचत बाटे बैरी मिली छोरले।
अस गाढ़ समय मे देखब तोहार हंस हाली-हाली उड़ले कि धीरे-धीरे डोललें॥ ३॥

ना लूटिहई द्रौपदी कतहू मतवा भेजबू जौउ धोती एहां से।
रोज तू सुरुज बोवलू खेत मे रोजई भेजलू जोती एहीं से।
माई रे तोरे असिसन के बल पाउब छंद के मोती एहीं से।
बाटई हमे बिस्वास बड़ा निह्चाई निकले रस सोती एहीं से ॥ ४ ॥

ढोग कविताई क रचाई गैल बाटै तब छोड़ी के दूआरी तोर बोल कहाँ जाई रे।
भाव नाही भाषा नाही छंद रस बोध नाही कलम न बाटै नाही बाटै रोसनाई रे।
कौरव सभा मे आज द्रौपदी क लाज बाटै गाढे में परली बाटै मोर कविताई रे।
हियरा लगाई तनी अचंरा ओढाई लेते लडिका रोवत बा उठाई लेते माई रे ॥ ५ ॥

ओहि दिन पुरहर राष्ट्र धृतराष्ट भैल भागि मे बिधाता जाने काउ रचि गईलें।
नाऊ त धरमराज नाहि बा सरम लाज हाइ राम लाज क जहाज पचि गईलें।
ठाट बाट हारि गईलें राजपाट हारि गईलें आगे अब काउ हारे काउ बची गईलें।
अंत जब द्रौपदी के दाँउ पर धई देले अनरथ देखि हहकार मची गईलें॥ ६ ॥

नाहि ढेर बड़ि बाटै नही ढेर छोटी बाटै नाहि ढेर मोटि बाटै नाहि ढेर पतरी।
छोट छोट दांत बाटै मोती जोति माथ बाटै तनी मनि गोरी बाटै ढेर ढेर सवंरी।
बड़ बड़ बाल बाटै गोल गोल गाल बाटै गोड लाल लाल बाटै लाल लाल अगुँरी।
बड़े बड़े नैन वाली मीठे मीठे बैन वाली द्रौपदी जुआरिन के दाँउ पर बा धरी॥ ७ ॥
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चंद्रशेखर मिश्र चंद्रशेखर मिश्र

29 टिप्‍पणियां:

  1. माननीय मुझे एवं प्रकाशक श्री चंद्रशेखर मिश्र द्वारा रचित द्रौपदी खंडकाव्य की पुस्तक उपलब्ध कराने में कृपा करें धन्यवाद

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    1. पुस्तक हेतु सम्पर्क सूत्र-
      9935819408

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    2. पंडित चंद्रशेखर मिश्र द्वारा रचित द्रोपति काव्य खंड की पुस्तक ऑनलाइन उपलब्ध कराने की कृपा करें

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  2. महोदय मुझे चंद्रशेखर मिश्रा द्वारा रचित द्रुपदी किताब खरीदनी है। कैसे मिलेगी?

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    1. Pdf bhee agar kitaab mil jaay to bahut kripa hogee

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    2. प्रशांत जी अभी आपने चन्द्रशेखर मिश्र रचित द्रौपदी खण्ड काव्य का ऑनलाइन पीडीएफ बिक्री (pdf me chahiye to hame batsye) ब्लॉग बन्द नहीं किया। यह आपका अधिकार नहीं किया है। उम्मीद है आप सहयोग करेंगे।
      धन्यवाद सहित
      डॉ धर्मप्रकाश मिश्र
      S/O पं चन्द्रशेखर मिश्र
      पं चन्द्रशेखर मिश्र शोध संस्थान,वाराणासी

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    3. हमे pdf मे चाहिए द्रौपदी महाकाव्य

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  3. माननीय मुझे चन्द्रशेखर मिश्रा जी द्रौपदी खंडकाव्य मुहैय्या करायें। मैने हर जगह ढूँढा पर मिल नहीं रही

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  4. मुझे द्रोपदी चीर हरण की काव्य चाहिए चंद्रशेखर मिश्रा जी का

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  5. आदरणीय चन्द्रशेखर मिश्र जी की सभी कृतियां चाहिये थीं। कृपया यथोचित सुझाव दें।

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  6. Mujhe mishra ji dwra rachit sita and lav kush khand kavy chahiye.

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  7. माननीय मुझे चन्द्रशेखर मिश्रा जी द्रौपदी खंडकाव्य मुहैय्या करायें। मैने हर जगह ढूँढा पर मिल नहीं रही

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  8. श्रीमान द्रौपदी चिरहरण काव्य का हिन्दी संस्करण चाहिये कहा मिलेगा

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  9. श्रीमान द्रौपदी चिरहरण काव्य का हिन्दी संस्करण चाहिये कहा मिलेगा

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  10. पुस्तक कहां मिल सकता है ।कृपया बताने की कृपा करें ।🙏

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  11. https://www.techgyan.co.in/2020/08/chandra-shekhar-mishra-draupadi-book-hindi-pdf.html

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  12. https://www.techgyan.co.in/2020/08/chandra-shekhar-mishra-draupadi-book-hindi-pdf.html

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  13. Bheeshm, aur draupadi, Chandrasekhar Mishra ji ki book kahan milegi Lucknow me

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