सँझवत अंक-7

सँझवत

अक्टूबर-दिसम्बर 2020 वर्ष - 2 अंक-7

संपादकीय

1. बदल रहल बा भोजपुरी का प्रति नजरिया - रामरक्षा मिश्र विमल

लेख/संस्मरण

2. रघुबीर नारायण - राजीव उपाध्याय
3. जेकर जीवन भोजपुरी पर नेवछावर रहे - डॉ ब्रजभूषण मिश्र
4. छठ मइया के परब आ एकर महातम - सौरभ पांडेय
5. कब तक चली भोजपुरी के संगे दगाबाजी - श्यामबिहारी श्यामल
6. हमार गाँव - तारकेश्वर राय 'तारक'
7. आचार्य-कवि पंडित धरीक्षण मिश्र - केशव मोहन पांडेय
8. कृष्णानंद कृष्ण: एगो इयाद - रामनिहाल गुंजन

कहानी/ लघुकथा

9. बन्द - डॉ अरुणमोहन 'भारवि'
10. मास्टर साहेब - डॉ जयकान्त सिंह 'जय'
11. किराया के परिवार - आन्दन सन्धिदूत
12. एकांकी
13. मोकदमा - निर्भय नीर

कविता

14. गजल - विद्या शंकर विद्यार्थी
15. गीत लिखीं - सतीश प्रसाद सिन्हा
16. मुट्ठी मे तऽ आज हमरो आसमान बा - विजयानंद विजय
17. कवि कुलभूषण स्व अंजन जी का प्रति उद्गार - कन्हैया प्रसाद रसिक
18. वसंत - संगीत सुभाष
19. गजल - रामरक्षा मिश्र विमल
20. गजल - अनीता शाह
21. गीत - रामेश्वर प्रसाद सिन्हा 'पीयूष'

एह अंक के छंद - सरसी

22. चलीं जा प्रेम बाँटे - गीता चौबे 'गूँज'

स्तंभ

23. धरोहर - आचार्य अंबिका दत्त त्रिपाठी 'व्यास' के एगो गीत
24. कार्टून साहित्य - भोजपुरी पंच - पंकज तिवारी
25. किताबि: एक नजर में
26. समीक्षा विशेषांक
27. लेखक लोगन से आग्रह
28. सोस्ती सिरी पत्री लिखीं


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