हेराइ गइल बखरा - गुरुविन्दर सिंह
अपुसे के रार में हेराइ गइल बखरा, टुकी- टुकी घरवार हाय रे बखरा। देसा-देसी घूमि सब शहरे पराइल गाँव के पिरितिया दुकहवाँ हेराइल गाँव ना भइल भइल ...
अपुसे के रार में हेराइ गइल बखरा, टुकी- टुकी घरवार हाय रे बखरा। देसा-देसी घूमि सब शहरे पराइल गाँव के पिरितिया दुकहवाँ हेराइल गाँव ना भइल भइल ...
भदई के असरा प'फिरि गइल पानी, लउके ना बदरी के नाँवो-निसानी अबकी असढ़वा बिगरि गइल जतरा बरिसल ना रोहिनी बिराइ गइल अदरा परि गइल अझुरा में सउ...
मिलल की जइसे भूलल थाती लिखल तहार मिलल जब पाती। रोजे रात निहारत रहनी हीते-नाते सबसे कहनी बहल लोर मोर साँझ-पराती। मन में, बहुते बिसवास रहल हिय...
पाती मिलल की जइसे भूलल थाती लिखल तहार मिलल जब पाती। रोजे रात निहारत रहनी हीते-नाते सबसे कहनी बहल लोर मोर साँझ-पराती। मन में, बहुते बिसवास...