डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव - राजेश भोजपुरिया
भोजपुरी काव्य में "छिउँकी" विधा के प्रयोग करे वाला साहित्यकार डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव "पता ना का बा अपना चेहरा में बेर-बेर देख...
भोजपुरी काव्य में "छिउँकी" विधा के प्रयोग करे वाला साहित्यकार डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव "पता ना का बा अपना चेहरा में बेर-बेर देख...
'दू सांस ले सकी जहाँ पे इत्मीनान के, चारो तरह निगाह में आवे ना ऊ मुकाम। ढाहेला रोज आदमी जीवन पहाड़ के, बीतल हजार साल, ना खिस्सा भइल तमाम।...