प्रतिज्ञा - प्रसिद्ध नारायण सिंह
अब हम चरखा चलइबै अरे सावनवां॥ मनवां बोवइबै, रूई उपजइबै, धुनियां से रुइया धुनइबै॥ अरे। बढ़ई बोलाइ चरखा बनवइबै, दिन रात सुतवा कतइबै॥ अरे। खट्ट...
अब हम चरखा चलइबै अरे सावनवां॥ मनवां बोवइबै, रूई उपजइबै, धुनियां से रुइया धुनइबै॥ अरे। बढ़ई बोलाइ चरखा बनवइबै, दिन रात सुतवा कतइबै॥ अरे। खट्ट...
लुटा दिहल परान जे, मिटा दिहल निसान जे। चढ़ा के सीस देस के, बना दिहल महान जे ॥1॥ जने-जने जगा गइल, नया नसा पिला गइल। जला-जला सरीर के, स्वदेस...
लुटा दिहल परान जे, मिटा दिहल निसान जे। चढ़ा के सीस देस के, बना दिहल महान जे॥ जने-जने जगा गइल, नया नसा पिला गइल। जला-जला सरीर के, स्व...
दुखियन के तन-मन-प्रान चलल। जब तीस जनवरी जाति रहलि, सुक के संझा मुसुकाति रहलि। दिल्ली में भंगी बस्ती के, धरती मन में अगराति रहलि॥ ज...
जब सन्ताबनि के रारि भइलि, बीरन के बीर पुकार भइलि। बलिया का ‘मंगल पांडे के, बलिबेदी से ललकार भइलि ॥1॥ ‘मंगल‘ मस्ती में चूर ...