हम त जनलीं कि बबुआ इनाम दीहें - महेंद्र मिश्र
हम त जनलीं कि बबुआ इनाम दीहें। हम नाहीं जनलीं कि जाने लीहें। बबुआ। केकई कारण हम अता दुख सहतानी लाखन सिकाइतो खूब सहलीं रे बबुआ। बिन...
हम त जनलीं कि बबुआ इनाम दीहें। हम नाहीं जनलीं कि जाने लीहें। बबुआ। केकई कारण हम अता दुख सहतानी लाखन सिकाइतो खूब सहलीं रे बबुआ। बिन...
महेन्दर मिसिर एगो विलक्षण गुनी आ धूनी के नाम ह। उनकर व्यक्तित्व कवनो एगो मोनिया में ना बंद रहे, ऊ त अइसन पारा रहले कि जेके जवने कोर से प...
राम लखन मोरा गोदी के खेलवना से हमरा के तेजी कहाँ गइलें हो लाल। के अब खइहें राम माखन मलइया से के अब खैहें मिठइया हो लाल। महल अटार...
आहो कान्हा ई का कइलऽ, आ हो कान्हा ई का कइलऽ। भूलि गइलऽ बचपन की बात कान्हा, ई का कइलऽ। बनवाँ कीला में काँट मोरा निकललऽ कान्हा ई का कइलऽ। ...
चिहुँकेली बार-बार अँचर उतार चले बे हँसी के हँसी पति देख कहँरी। मार-मार हलुआ निकाले ऊ भतरऊ के डाँट के बोलावे कोई बात में ना ठहरी। घरे-...
चलत-चलत मोरा पईया पिरइले, ए ननदिया मोरी रे तबहूं ना मिलेला उदेश, ए ननदिया मोरी रे। अपने न अइलें पिया भेजलें ना सनेसवा, ए ननदिया मोरी रे। ...