बसंत: एगो रंगीन सतरंगी चूनर - परिचय दास
मन के अँगना में एगो रंगीन सतरंगी चूनर लहरा गइल बा। बहे लागल बा बसंती बयार, जेहमें सोनपुर के मेलवा जइसन गंध बसल बा। धरती के आँचल में सरसों के...
मन के अँगना में एगो रंगीन सतरंगी चूनर लहरा गइल बा। बहे लागल बा बसंती बयार, जेहमें सोनपुर के मेलवा जइसन गंध बसल बा। धरती के आँचल में सरसों के...
सगुण के फेरा में निर्गुण ना भेंटाइल ना रामजी मिलले,ना कृष्ण कन्हाई फेरा कवनो चीज के ठीक ना ह ई सुनले रहीं बाकिर तोतवा दाल के फेर में जाल मे...
जिनगी के दुपहरिया खोजे जब-जब शीतल छाँव रे पास बोलावे गाँव रे आपन, पास बोलावे गाँव रे। गाँव के माटी, माई जइसन खींचे अपना ओरिया हर रस्ता, चौरा...
प्रेम एगो अइसन लड़िका जिनका पर घर परिवार के पूरा जिम्मेदारी रहे, ऊ अपना परिवार में बड़ रहले एहिसे उनका हर चीझु के ख्याल रखे के रहे,अपना परिवार...
4. जरूरी बा भोजपुरी के स्वाभिमान से जोड़ल ओइसे त बहुत पहिले से संविधान का आठवी अनुसूची में भोजपुरी के डलवावे के माङ भोजपुरिया करत बाड़न बाकिर ...
दुख के चादर ओढ़ले मनई के आँगन इंतजार रहे सुख के एगो छोट टुकड़ा के काहे राह भुला गइल सुख के चान। अमावस्या त घरे बइठल रहे इंतजार रहे पूनिया के...
हमरा खातिर उज्जर दिनआ अँजोरिया रात का बा? हवा के झकोरा से उधियाइल माँटी में लसराइल ओही में समाइल माँटी में मिलि के माँटी बनि गइल माँटी खातिर...
राजू आज परदेश से अपना देश जा तारें। वइसे त राजू के ऑफिस बम्बई में बा बाकिर ऑफिस का काम से हफ्ता - दस दिन खातिर विदेश जात आवत रहेलें। ई पहिला...
केतना दिन अउरी चलत रही चकरी। कूटि-पीसि खा गइनीं जिनिगी के सगरी। जोरत-अगोरत में थाती हेराइल तनमन के गरमी सब देखते सेराइल धार में चिन्हाइल ना,...
अहमेव वात इव प्र वाम्यारभमाणा भुवनानि विश्वा। परो दिवा पर एना पृथिव्यैतावती महिना सम्बभूव।। १ (हमीं हवा का तरे बहीले बिस्व भुवन के अँकवारी ल...
भदई के असरा प'फिरि गइल पानी, लउके ना बदरी के नाँवो-निसानी अबकी असढ़वा बिगरि गइल जतरा बरिसल ना रोहिनी बिराइ गइल अदरा परि गइल अझुरा में सउ...
जियरा धक-धक धड़क रहल बा फर-फर अंखियां फरक रहल बा देख-देख के दिन दशा मन होखत बा बेचैन मन बाटे बेचैन। आसमान झुकत बा जइसे लागत बा मनवा के अइसे ...
मय दुनियाँ में कवि जी अउवल कविता हउवे बात बनउवल। गढ़ीं भले कवनों परिभाषा मंच ओर तिकवत भरि आशा गोल गिरोह भइया दद्दा साँझ खानि के पूरे अध्धा। क...
बढ़ल महंगाई बाटे तनिको ना सोहाता। जातिये धरम पर खाली खतरा बुझाता॥ कहे खातिर पुरहर भइल बा विकास धरती पर कुछ्वु ना बाटे मय आकाश। जनता की अँखिया...
जिन दिन पाया वस्तु को तिन तिन चले छिपाय॥ तिन तिन चले छिपाय प्रगट में हो हरक्कत। भीड़-भाड़ में डरै भीड़ में नहीं बरक्कत॥ धनी भया जब आप मिली ह...
पंछी दूर ठिकाना बा। कहिया ले ई रात अन्हरिया बइटल हँसी उडाई कब विहान के झिलमिल रेखा सपना बन मुस्काई। कब ले धुन्ध छँटी जिनगी के कहँवा भोर सुहा...