अउरी चमक उठल - राजीव उपाध्याय
शहर के चमक जब आँख ले चहुँपे ला तऽ पहिले नजर चौधिंया जाला। बहुत देर कुछ लउकबे ना करेला। बाकिर धीरे-धीरे जब आँख ओह चमक के सोख लेला तऽ बुझाला क...
शहर के चमक जब आँख ले चहुँपे ला तऽ पहिले नजर चौधिंया जाला। बहुत देर कुछ लउकबे ना करेला। बाकिर धीरे-धीरे जब आँख ओह चमक के सोख लेला तऽ बुझाला क...
जब ऊँच-ऊँच मकान लउके लागे तऽ मन कह देला कि शहर आ गइल बा। आ जब मकान दस-बीस तल्ला होखे तऽ लाग जाला कि केवनो राजधानी में पहुँच गइल बानी। दिल्ली...
रामनवमी के दिन रहे। शिव-लगन बो अहिरिन के, देवास लागल रहे। ऊ नहाइ धोयाइ के, नया लूगा झुला पहिर के, मूडी गडले बइठल रहली। माता मइया के, आवही के...
प्रेम एगो अइसन लड़िका जिनका पर घर परिवार के पूरा जिम्मेदारी रहे, ऊ अपना परिवार में बड़ रहले एहिसे उनका हर चीझु के ख्याल रखे के रहे,अपना परिवार...
राजू आज परदेश से अपना देश जा तारें। वइसे त राजू के ऑफिस बम्बई में बा बाकिर ऑफिस का काम से हफ्ता - दस दिन खातिर विदेश जात आवत रहेलें। ई पहिला...
नेता जी सोमार के गाँव में वोट माँगे आवेवाला रहनीं। अतवारे के साँझि के नेता जी के खास पूरन घर-घर फूल के माला बाँटत रहलें। पूरन के गिनती गाँव ...
अंडा बेचे वाली मनोरमा पहिले अंडा ना बेचत रही. उ एगो घरेलू महिला रही, जे अपना मरद भूलन आ बेटी आरती के साथे खूब बढ़िया से आत्मसम्मान के जिनिगी...
रामजी आउर केहू ना हमरा गाँव में के एगो आदमी के नाम ह। आ ई रामजी केहू के जरताह आंँखीं से कबो ना ताकस। खेतिहर आदमी हवन।बधार के चारों सिवान में...
रामसेवक आ सीताराम एके ऑफिस में काम करत रहे लो। दूनू जाने लइकाईं के संघतिया रहे लोग आ सब तरे बराबर रहे लो। एक दिने सीताराम कहले “भाई रामसेवक,...
गनिया टमटम उडबले चल जात रहे। टमटम ढकर-ढकर करत रहे। ओकर पार्ट-पूजा बुझात रहे कि अलग-अलग हो जाई। सड़कि उभड़-खाभड़ रहे। टमटम पर बइठल डाक्टर मने...
नेता जी भर गर गेना का फूल के माला पहिनले, दुनू हाथ जोरले, मन्द- मन्द मुसुकात आगे- आगे चलत रहनीं। पीछे से कानफारू सुर में नारा लागत रहे। हमार...
इ सन् 1960 के बात ह। तब हम बनारस पढत रहलीं। वो दिन हम अपने कमरा मे पढले मे तल्लीन रहलीं कि तबले हमके बुझाइल कि केहू हमरे लगे आके ठाढ हो गइल ...
जानू दा।पूरा नाम जमालुद्दीन खान।मिलकी पर के जमिंदार।सांझी खा दलान पर जब बैठकी में बइठस त गाँव के हिन्दू मुसलमान सभे जुटत रहे।जुटे काहे ना वे...