डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव - राजेश भोजपुरिया
भोजपुरी काव्य में "छिउँकी" विधा के प्रयोग करे वाला साहित्यकार डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव "पता ना का बा अपना चेहरा में बेर-बेर देख...
भोजपुरी काव्य में "छिउँकी" विधा के प्रयोग करे वाला साहित्यकार डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव "पता ना का बा अपना चेहरा में बेर-बेर देख...
नारी केवल जीवन के दाता ना हई, ऊ आपने-आप में सृष्टि के हरेक गुण के समाहित स्वरूप हई। उनकर हर काम,हर विचार आ हर छुअन जीवन के एगो नया अर्थ आ नय...
पचइयाँ के दिन जब आँगन के गोबर लिपल धरती साँप के बरे सजावल जाला, त उ घरी गाँव के हावा में एगो गंध उठेला—माटी, दूध, गोबर, दूब आ आँच के। पचइयाँ...
मन के अँगना में एगो रंगीन सतरंगी चूनर लहरा गइल बा। बहे लागल बा बसंती बयार, जेहमें सोनपुर के मेलवा जइसन गंध बसल बा। धरती के आँचल में सरसों के...
सगुण के फेरा में निर्गुण ना भेंटाइल ना रामजी मिलले,ना कृष्ण कन्हाई फेरा कवनो चीज के ठीक ना ह ई सुनले रहीं बाकिर तोतवा दाल के फेर में जाल मे...
अहमेव वात इव प्र वाम्यारभमाणा भुवनानि विश्वा। परो दिवा पर एना पृथिव्यैतावती महिना सम्बभूव।। १ (हमीं हवा का तरे बहीले बिस्व भुवन के अँकवारी ल...
डॉ सुनील कुमार पाठक भोजपुरी साहित्य के एगो सुपरिचित हस्ताक्षर हवें जे गद्य, पद के साथे भोजपुरी आलोचना के क्षेत्र में आपन बरियार उपस्थिति दर्...