बाण लागल श्रवण के - डॉ कमलेन्दु कुमार पाण्डेय

सुनऽ कोशिल्या आज कहब सब,
हमरे करमवा क पाकल फल अब,
खेलत रहलीं अहेर हो, बाण लागल श्रवण के,
लागल श्रवण के हो लागल श्रवण के।
जंगल मेंरहल कुहेस हो, बाण लागल श्रवण के।
खेलत रहलीं अहेर हो,
बाण लागल श्रवण के।

हम तऽ जनलीं कि नदिया के तीरे,
पानी पियत बा गज धीरे धीरे।
तीर चलवलीं विशेष हो ,
बाण लागल श्रवण के।।

सुनसुलीं जब केहुकेहुके गोहरावत,
झट दे पहँचलीं धावत धावत।
सोरह साल कऽ सुंदर लईका,
बाण हृदय में आइ लगल बा।
भुइयाँ परल बा बेहोश हो
बाण लागल श्रवण के।।
देखलीं त उड़ गइलं होश हो,
बाण लागल श्रवण के।।

आँखआँ उघार के हमके कहलस,
ई का कईलऽ राजन मोह बस,
नइखीं जानत अब का करिहैं,
मात पिता जल बिन मरि जैहें,
पनिया पिया द नरेश हो,
बाण लागल श्रवण के।।

गोद में हमरे छोड़लं शरीरवा,
पास में घट रहे , घट में नीरवा।
कान्हीं पर रख के श्रवण के चललीं,
रस्ता में कुलदेव मनवलीं,
ब्रम्हा, बिष्णु, णु महेश हो
बाण लागल श्रवण के।।

सूखे जीभ , चढत बा संसिया,
कैसे कहीं जौन बीतल बतिया,
श्रवण के आन्हर मात पिता के,
रो-रो बतवलीं हर बतिया के।
मात पिता रो-रो मरि गइलैं
श्राप भयानक हमके देहलैं।
रहे द आँसूआँ सूरहे द पानी,
जइसन दुखदु हम सहत बानी।
तोहरो पर बीती नरेश हो
बाण लागल श्रवण के।।

उहे सरपवा आज फलत बा,
राम वियोग में मन तड़पत बा,
अब न रहल कुछ शेष हो,
बाण लागल श्रवण के।
लागल श्रवण के हो लागल श्रवण के,
जात बानी दूसर देश हो
बाण लागल श्रवण के।
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डॉ कमलेन्दु कुमार पाण्डेय
प्रोफेसर, कम्प्यूटर विभाग
दक्षिण गुजरात युनिवर्सिटी
गाँव - दियाँ,
कैमूर, बिहार
फोन नं: 9427111526

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