अचके में लोगवा भुला जाला हो - कलामुद्दीन कमली 'एक एहसास'

जब अचके में लोगवा भुला जाला हो।
दिल के अरमान सगरी लुटा जाला हो।

रोज़ जरत रहे जवन स्नेहियां के बाती,
बिन हवा के ऊ काहे बुता जाला हो।

केहू पूछ लेवेला हंस के जे हाल हमर,
मन अढ़उल के ज‌ईसन फूला जाला हो।

दिन में चयन नइखे मिलत रोटी खातिर ,
रातियों में काहवा निंदिया हेरा जाला हो।

आदमी आदमी के मारता पईसा खातिर,
धन ध‌ईले रह जाई देह ओरा जाला हो।

सब चिंता फ़िकर वोही दिन खतम होला,
ज़हिया सबदीन ला अंखियां मुना जाला हो.!
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नाम:- कलामुद्दीन कमली 'एक एहसास'
घर:- सिरिसिया
पोस्ट:- बेलवा
थाना:- साठी
जिला:- पश्चिमी चंपारण (बिहार)

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