बाण लागल श्रवण के - डॉ कमलेन्दु कुमार पाण्डेय
सुनऽ कोशिल्या आज कहब सब, हमरे करमवा क पाकल फल अब, खेलत रहलीं अहेर हो, बाण लागल श्रवण के, लागल श्रवण के हो लागल श्रवण के। जंगल मेंरहल कुहेस ह...
सुनऽ कोशिल्या आज कहब सब, हमरे करमवा क पाकल फल अब, खेलत रहलीं अहेर हो, बाण लागल श्रवण के, लागल श्रवण के हो लागल श्रवण के। जंगल मेंरहल कुहेस ह...