अचके में लोगवा भुला जाला हो - कलामुद्दीन कमली 'एक एहसास'
जब अचके में लोगवा भुला जाला हो। दिल के अरमान सगरी लुटा जाला हो। रोज़ जरत रहे जवन स्नेहियां के बाती, बिन हवा के ऊ काहे बुता जाला हो। केहू पूछ...
जब अचके में लोगवा भुला जाला हो। दिल के अरमान सगरी लुटा जाला हो। रोज़ जरत रहे जवन स्नेहियां के बाती, बिन हवा के ऊ काहे बुता जाला हो। केहू पूछ...