अँगऊ - अक्षयवर दीक्षित

माई ! तोरा आँचर तर हम सब सुख पवनी, जनम संवरनी
कईसन कईसन खेल खेलि के तोरा के सचहूँ अगरवनी।

जहाँ कबो हम अलगा जाईं तोरा खातिर उ दुखदाई
प्यार भरल उ अमरित दे तें चाहे केतनो उधम मचवनी।

अब हम जन-सेवा अपनाईं तोरा दूध के लाज बचाईं
साँचो सज्जन के गुन गाईं, अब ले केतना समय गँववनी।

देश-राष्ट्र खातिर ई देहिया अमर शहीदन से नित नेहिया
इहे तें आसीस सदा दे, केतना लोगन के भरमवनी।

गुरु-पुरोहित के रे माई ! तें अँगऊ दिहले हरसाई
तोरे सिखवन करत करत हम संतोषे में सुख अपनवनी।
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अँगऊ - अक्षयवर दीक्षित
अक्षयवर दीक्षित

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