गवन ले जइहऽ

गवन ले जइहऽ, अभी तऽ उमिरिया बेवे काँच
दिन कुछु छोड़ि दऽ, सीखे के बावे सब बात॥
                       गवन ले जइहऽ॥

ससूरा के उँच-नीच अभी ना बुझाई
आँगन देखि-देखि मन ललचाई
दिनवा भेजइहऽ बादे, नऊआ के हाथ॥
                गवन ले जइहऽ॥

अबहीं ना आवे चुल्हा फूंके हमरा
गोईंठा जराइब कइसे
औरी लकड़ी होई बेहाथ॥
      गवन ले जइहऽ॥

तोहरी मइया के बात ना बुझाई
औरी ननद रिगईहों
डर बा कि हमसे हो जाई बात बेबात॥
                 गवन ले जइहऽ॥
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लेखक परिचय:-

पता: बाराबाँध, बलिया, उत्तर प्रदेश
लेखन: साहित्य (कविता व कहानी) एवं अर्थशास्त्र
संपर्कसूत्र: rajeevupadhyay@live.in
दूरभाष संख्या: 7503628659
ब्लाग: http://www.swayamshunya.in/

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