फूल खिले लागल - बृजमोहन प्रसाद 'अनाड़ी'
फूल खिले लागल, सुख मिले लागल, अब बुझाता बसन्त मधुमास आ गइल। कहीं कलि पर अलि बिहार करता, कोइलरियो के दिल में हुलास आ गइल। फूल खिले लागल ……….॥...
फूल खिले लागल, सुख मिले लागल, अब बुझाता बसन्त मधुमास आ गइल। कहीं कलि पर अलि बिहार करता, कोइलरियो के दिल में हुलास आ गइल। फूल खिले लागल ……….॥...
अब ना सहात बा, कोइलिया के बोलिया बोले बसवरिया पर भोर के पहरिया तऽ लागे जइसे गोलिया। अब ना सहात बा……….॥ सेजिया पर लोटेली काली रे नगीनिया, रोज...
झुरू झुरू पछुवा कड़ेर पुरवइया में, बाड़ा नीक लागेला टुटलकी मड़इया में। गोल गाल गुलवरी के लगे कोलूहाड़ी छवरी के ओर पार लउके उखियाड़ी, होखेला ...