फूल खिले लागल, सुख मिले लागल,
अब बुझाता बसन्त मधुमास आ गइल।
कहीं कलि पर अलि बिहार करता,
कोइलरियो के दिल में हुलास आ गइल।
फूल खिले लागल ……….॥
धरती पीयर हो गइली दुल्हनिया नियर,
ओस चमकेली चनिया के पनिया नीयर।
बगिया में नबाब बनि गइले गुलाब,
इ बुझाता धरती पर आकाश आ गइल।
फूल खिले लागल ……….॥
नाया किसलय निकसले झरल पात जब,
रट पपीहा लगवलसि बनत बात तब।
रोज मलय पवन मन के पागल करे,
घास पातो पर नाया सुबास आ गइल।
फूल खिले लागल ……….॥
मन ना रोकले रोकाला रसदार भइले,
रतिपति चारू ओर पहरेदार भइले।
मस्त भइले ‘अनारी’ छठा देखि के।
जे फलेवों रहल अनुका पास आ गइल
फूल खिले लागल ……….॥
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बृजमोहन प्रसाद 'अनाड़ी'
ग्राम- कुम्हियां, पोस्ट-भरखरा,
जिला-बलिया उत्तर प्रदेश, पिन कोड-277304
मो0 नं0- 09450953545

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