मजबूरी - डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव
आँखी में लोर काहे जी? हमार बाबा मर गइनी हम उहाँ के देखहूँ ना गइनी काहे? बॉस छुट्टी ना दिहलन तऽ का करब आज के नौकरी सब नाता-रिश्ता चबा के बइठ ...
आँखी में लोर काहे जी? हमार बाबा मर गइनी हम उहाँ के देखहूँ ना गइनी काहे? बॉस छुट्टी ना दिहलन तऽ का करब आज के नौकरी सब नाता-रिश्ता चबा के बइठ ...
भोजपुरी काव्य में "छिउँकी" विधा के प्रयोग करे वाला साहित्यकार डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव "पता ना का बा अपना चेहरा में बेर-बेर देख...
राउर मुस्की के चुस्की पर हम तऽ लुटा गइनी मन भइल, तनी भर गाल बतियइती हमरा बात पर रउआ अइसन हँसनी भहरा गइल भीतर के दांत जमीन पर अइसन छितराइल मो...