मजबूरी - डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव

आँखी में लोर काहे जी?
हमार बाबा मर गइनी
हम उहाँ के देखहूँ ना गइनी
काहे?
बॉस छुट्टी ना दिहलन
तऽ का करब
आज के नौकरी सब नाता-रिश्ता
चबा के बइठ गइल बा।
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डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव

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