भोजपुरी काव्य में "छिउँकी" विधा के प्रयोग करे वाला साहित्यकार डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव
"पता ना
का बा
अपना चेहरा में
बेर-बेर देखलो पर
मन ना भरे।"
हिन्दी आ भोजपुरी में लगातार साहित्य लिखे वाला आ इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, दिल्ली के भोजपुरी पाठ्यक्रम समिति के संयोजक आ सदस्य रहल स्व. डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव के जनम 19 जून,1939 के ग्राम - पचरुखी, सिवान (बिहार) में भइल रहे।
उहां के पढ़ाई-लिखाई एम.ए., पीएच.डी. तक लखनऊ आ पटना विश्वविद्यालय से भइल रहे।
हिन्दी आ भोजपुरी भाषा साहित्य के भण्डार भरे में उहां के लगातार लागल रही। उहां के हिन्दी आ भोजपुरी के कई गो पुस्तक प्रकाशित बाड़ी सन।
हिन्दी में उहां के लगभग चालीस गो पुस्तक प्रकाशित बाड़ी सन। जवना में उपन्यास, हास्य-व्यंग्य, समीक्षा-सम्पादन प्रमुख बाड़ी सन।
भोजपुरी में उहां के कलम विशेष रूप से चलत रहे। डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव जी के कई गो संस्थन से संबद्धता भी रहे, जवना में दिल्ली मैथिली-भोजपुरी अकादमी के सदस्य भी रही, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के भोजपुरी पाठ्यक्रम समिति के सदस्य, विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य आ आस्वाद (साहित्य आ संस्कृति) नामक संस्था के संचालक भी रही।
उहां के साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था 'आस्वाद' के जेतना होली-मिलन भइल रहे ओह पर एगो संयोजन करत "मूर्ख-सम्मेलन" नाम से एगो पुस्तक प्रकाशित कइले रहीं।
भोजपुरी के बात चलल बा त बतावत चलीं कि उहां के भोजपुरी में भी बहुत काम कइले बानी। दिवंगत भइला के कुछ दिनन पहिले में भोजपुरी छिउँकी पर लगातार काम करत रही। भोजपुरी कविता में "छिउँकी" विधा नया बा।
उहां के कहनाम रहे कि - "छिउँकी" हमार मन के उपज ह। छिउँकी के बारे में कहले रही कि रूप आकार मे चिउटा आ चिउटी के बीच छिउँकी होली सन। छन्न दे काट के सरसरइले भाग जाली सन। छिउँकी के एगो दोसर रूप भी होला, पातर लपलपात छड़ी छिउँकी कहाले। केहु पर चला दी त छन्न दे चोट बुझाला, बाद में तनिका देर में बिसर जाला। उहां के मन मे छिउँकी के इहे बिम्ब रहे। उ पढ़े वाला भा श्रोता समूह के छनाक से काट के ओकरा हँसे-रोये के पहिले गायब हो जाले।देखी इहां कुछ उदाहरण प्रस्तुत करे के प्रयास बा -
"आँखी में लोर काहे जी?
हमार बाबा मर गइनी
हम उहाँ के देखहूँ ना गइनी
काहे?
बॉस छुट्टी ना दिहलन
त का करब
आज के नौकरी सब नाता-रिश्ता
चबा के बइठ गइल बा।"
"राउर मुस्की के चुस्की पर
हम त लुटा गइनी
मन भइल, तनी भर गाल बतियइती,
हमरा बात पर रउआ अइसन हँसनी,
भहरा गइल भीतर के दांत जमीन पर
अइसन छितराइल मोती देख के
हमरा त ठकुआ मार देहलस।"
रमाशंकर जी के भोजपुरी में प्रकाशित पुस्तकन के, जवना में 'दाल-भात तरकारी' (भोजपुरी उपन्यास), 'चउका बइठल महादेव' (भोजपुरी कहानी संग्रह), 'इया के खटोली' (भोजपुरी बाल उपन्यास), 'लसरा कुटाइन' (भोजपुरी व्यंग्य कविता-छिउँकी संग्रह), 'मकई के लावा' (भोजपुरी छिउँकी-संग्रह), 'लइका भतार' (भोजपुरी छिउँकी-संग्रह) इत्यादि प्रमुख बाड़ी सन। एकरा अलावा कई गो किताब प्रकाशन के कतार में रहे, जवन पता ना आगे देखे के मिली आ की ना?
उहां के लिखल साहित्य के चुनिन्दा रचनन पर आधारित तीन गो खण्ड में "शंकर रचनावली" नाम से पुस्तक भी प्रकाशित बा। जवना के माध्यम से आगे आवे वाला आज के पीढ़ी अपना संस्कृति के संस्कार ग्रहण करी।
डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव जी के सम्पूर्ण साहित्य के बात कइल जाय उ उपन्यास होखे, कहानी होखे, कविता होखे, आलेख होखे भा हास्य-व्यंग्य सभे में पारम्परिक भारतीय जीवन के झलक मिलेला। उहां के कवनो विधा पढ़ला पर मन कबो ना अघाई। आवे वाला समय रमाशंकर जी के रचनाकर्म के मूल्यांकन करी।
उहां के कई गो सम्मान-अलंकरण से सम्मानित भी रही, जवना में हिन्दी व्यंग्य लेखन में हिन्दी अकादमी दिल्ली द्वारा काका हाथरसी सम्मान, छठा विश्व हिन्दी सम्मेलन लंदन में व्यंग्य साहित्य पर आलेख पाठ पर सम्मान प्रमुख बाड़ी सन। एकरा अलावा कई गो छोट-बड़ मंचन से अनेकों पुरस्कार सम्मान से सम्मानित भइल रही।
उहां के सम्पादन में तिमाही पत्रिका श्रीप्रभा प्रकाशित होत रहे।
स्व.रमाशंकर श्रीवास्तव जी के कविता, गीत, हास्य व्यंग्य भा आलेख पाठ के प्रसारण आकाशवाणी आ दूरदर्शन से भी बराबर होत रहे। डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव जी बाबूजी के बढ़िया साहित्यिक मित्र में रहीं। हमरो से बढ़िया परिचय रहे, दिल्ली पहुचला पर भेंट होत रहे आ कबो कबो दूरभाष पर भी भोजपुरी भाषा साहित्य के चर्चा करत रहीं।भोजपुरी जन जागरण अभियान के भोजपुरी आंदोलन के भी उहां के खूब सराहत रहीं।
उहां के ना रहला से हिन्दी-भोजपुरी साहित्य जगत में कमी जरूर महसूस कइल जाता। उहां से स्नेह,आशीर्वाद आ मार्गदर्शन हरमेश मिलत रहे। भोजपुरी साहित्य के भण्डार भरे में उहां के योगदान के भुलावल नइखे जा सकत।
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राजेश भोजपुरिया
लेखक-समालोचक
राष्ट्रीय संयोजक, भोजपुरी जन जागरण अभियान
जमशेदपुर।
सम्पर्क:- 9031380713
- राजेश भोजपुरिया,
जमशेदपुर।
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