सुत जा बाबू - प्रणव राज

ए बेटा सुत जा बाबू,
फिर उठिहऽ बिहान,

देखिह आपन बाबूजी के,
जोतत उनकर खलिहान,

मामा के संग खेत घूमिहऽ,
हम सबके माथा चुमिहऽ,

तोहरे प्यार करे ला काबु,
ए बेटा सुत जा बाबू।
---------------------

प्रणव राज

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान (Maina Bhojpuri Magazine) Designed by Templateism.com Copyright © 2014

मैना: भोजपुरी लोकसाहित्य Copyright © 2014. Bim के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.