सुत जा बाबू - प्रणव राज
ए बेटा सुत जा बाबू, फिर उठिहऽ बिहान, देखिह आपन बाबूजी के, जोतत उनकर खलिहान, मामा के संग खेत घूमिहऽ, हम सबके माथा चुमिहऽ, तोहरे प्यार करे ला ...
ए बेटा सुत जा बाबू, फिर उठिहऽ बिहान, देखिह आपन बाबूजी के, जोतत उनकर खलिहान, मामा के संग खेत घूमिहऽ, हम सबके माथा चुमिहऽ, तोहरे प्यार करे ला ...