आयल करऽ निराले में राजा कबौं कचौं।
दरसन दिहल करऽ ए कन्हैया कत्रों कत्रौं॥
कुन्नन तोहार मुखड़ा वनौलन हैं रामजी,
चुम्मा दिहल करऽ ए कन्हैया कबौं कबौं॥
छावा, छलावा, पंछी औ खेवा, परान, जिउ,
बैठावऽ ला रिखड़या तमोलिया कबौं कबौं॥
बन जाईला चकोर मतिन् जब हमार चॉन,
छोड़ऽ ला रामधै जऽ छलावा कबौं कत्रौं॥
गंगा के पार गैबी पै नद्दी के तीर 'तेग'
पहुँचेलै एकेक रामधै खेवा कवौं कवौं॥
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