सनन नन सन सन बहेले पुरुवइया
चन्दा ओढ़ावे राति चानी के चदरा
सूरज उड़ावेलें सोने के बदरा
बदरे में चकती लगावे मोरी नइया
सनन नन सन सन...
बरुण जी की कुइयाँ से भरि भरि गगरिया
चलली झमकि के गगन के गुजरिया
अब्बें ओरियानी त अब्बें ओसारी
नाँचे मुड़ेरीं, अगनवाँ, दुअरियाँ
लागल ठोपारी चुवावे पतझ्या
सनन नन सन सन...
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