चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह: एगो प्रेरणा, एगो मार्गदर्शक - राजेश भोजपुरिया

'दू सांस ले सकी जहाँ पे इत्मीनान के,
चारो तरह निगाह में आवे ना ऊ मुकाम।
ढाहेला रोज आदमी जीवन पहाड़ के,
बीतल हजार साल, ना खिस्सा भइल तमाम।'
चर्चा करब भोजपुरी साहित्य के भण्डार भरे में आपन तन-मन-धन न्योछावर करे वाला भोजपुरी के विद्वान मनई, कई गो शोधार्थी छात्र लोगन के प्रेरना आ हमनी के मार्गदर्शक स्व.चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह जी के। इहां के भोजपुरी के बचपन से ही जियल बानी। भोजपुरी में नाया नाया प्रयोग के इहां के जन्मदाता भी कहल जा सकेला। जय भोजपुरी बोलल इहां से ही सिखल लोग। हमरा इयाद बा जब भी केहु से मिलत रही त सबसे पहिले जय भोजपुरी ही बोलत रही।
चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह जी के जनम 02 जनवरी, 1941 के नोनार गाँव, पिरो, जिला भोजपुर (बिहार) में भइल रहे। लिखाई-पढ़ाई कृषि स्नातक में कइनी। स्नातक भइला के बाद आजीविका के क्षेत्र में बिहार कृषि सेवा में अइनी। बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत भोजपुरी, मगही, मैथिली, पंच परगनियाँ, मुंडारी, उराँव, संथाली, पहाड़िया भाषा-भाषी क्षेत्रन में रह के जनवरी 1999 तक सरकारी सेवा में रहनी। जिला कृषि पदाधिकारी पद से सेवानिवृत्त भइल रही। एह दौरान हमरा याद बा कि इहां के एक-दू बेर हमरा घर पर जमशेदपुर भी आइल रही। इहां से स्नेह हमरा बराबर मिलत रहे। हमरा याद बा अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के कई गो अधिवेशन में इहां से भेंट भइल रहे आ इहां के आशीर्वाद प्राप्त भइल।हमरा याद बा अंतिम बेर इहां से रायपुर अधिवेशन में भेंट भइल रहे आ भोजपुरी पर बहुत सारा बतकही भइल रहे।
इहां के भोजपुरी के हर विधा में रचना कइले बानी कविता, गीत, गजल, एकांकी, नाटक, हाइकु, सेनरयु, सोरठा, दोहा, कुंडलियाँ, उपन्यास आ शोध परक पुस्तकन के प्रकाशन। 1984 ई में इहां के गजलन के संग्रह 'नया एगो सूरज' प्रकाशित भइल रहे, जवना में 36 गो गजल संकलित बाड़ी सन।
भोजपुरी के प्रति अतना गहिरा लगाव, समर्पण आ एकनिष्ठ भाव शायद कवनो भोजपुरी के रचनाकार में होई। इहां के खासियत ई रहे कि लेखन के दिशा में बराबर एगो प्रयोग करत रही। सामान्य रचनाकार से अलग हट के नाया प्रयोग करे के, कुछ लिखे के हरदम प्रयास करत रही। एकरे परिणाम रहे कि एही क्रम में आरोही हजारा, बरबै ब्रह्म रामायण, सहस्त्र दल, वीरकुंवर सिंह गाथा, भोजपुरी साहित्यकार दर्पण (3 भाग) के रचना कइनी। इहां के एकांकीओ खूब लिखले बानी। इहां के पहिला एकांकी संग्रह 1992 ई में 'आदमियत' के नाम से प्रकाशित भइल। सन 2000 में नाटक के एगो पुस्तक 'साक्षात लक्ष्मी' प्रकाशित भइल। इहां के एकांकी अनेक पत्र-पत्रिकन भोजपुरी माटी, हाल-चाल, भोजपुरिया अमन, भोजपुरी विश्व, पाती, लुकार, उड़ान, लकीर इत्यादि में पढ़े के मिलल। एकांकी के दू गो संग्रह 'धर्मी' आ 'अनुमन्ता' 2014 में आरा से प्रकाशित भइल बा। इहां के भोजपुरी इनसाइक्लोपीडिया के दाता भी बानी।
चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह जी के दिवंगत भइला के बाद इहां के जवन पुस्तक, जवन शोध, जवन गीत गजल के अप्रकाशित पांडुलिपि रह गइल रहल, जवन उहाँ के रहते प्रकाश में ना आइल ओकरे के सहेजे, समेटे आ प्रकाशन के सराहनीय काम इहां के बड़ बेटा आदरणीय श्री कनक किशोर जी कर रहल बानी। एही दिसाईं चौधरी जी के लिखल गीतन के संकलन 'गोपी गीत' के नाम से कृपा शंकर प्रसाद आ अशोक कुमार तिवारी, एकांकी आउर नाटक संग्रह 'आरोही रचनावली' 2 भाग अंकुश्री, चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह इयादों के झरोखा में' डॉ रामजन्म मिश्र, 'भोजपुरी कथाकोश' कृपाशंकर प्रसाद आ दिलीप कुमार के संपादन में प्रकाशित भइल बा। एह कड़ी में कई गो अउरी पुस्तक आ कोश प्रकाशन के कतार में बाड़ी सन।
ज्ञात होखे कि, पिछला साल इतेफाक कही भा हमार संजोग 17.04.2019 के हम जमशेदपुर से अपना परिवार का साथे विक्रमगंज, रोहतास, बिहार पहुँचल रही कि अचानक ले कनक भइया के मैसेज देखनी तऽ पता लागल कि ओह दिन चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह चाचाजी के पुण्यतिथि रहे आ दोपहर 1:00 बजे आरा (बिहार) के वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय में स्थित भोजपुरी विभाग भवन में श्रद्धांजलि सभा आयोजित रहे। ओह अवसर पर पुस्तको के लोकार्पण होखे के रहे। हम अपना आप के रोक ना पवनी आ रात भर के बस के यात्रा कइला के बाद नहा के तइयार भइनी आ निकल गइनी आरा खातिर जहवाँ ई आयोजन होखे के रहे। उहाँ पहुँच के चौधरी चाचा जी के तस्वीर पर फूल चढ़ा के आपन श्रद्धा सुमन अर्पित कइनी आ पुस्तक लोकार्पण तक रुकनी। एह आयोजन के अध्यक्षता श्री गदाधर सिंह जी कइले रही। सम्मानित अतिथीयन के रूप में श्री शिवपूजन लाल विद्यार्थी (बनारस) आ श्री हरेराम त्रिपाठी'चेतन' (राँची) से उपस्थित रहले। ई दुनो लोग के सुने के मौका भी मिलल रहे। एह आयोजन में 'आरोही रचनावली भाग-3' ,भोजपुरी कथाकोश आ 'चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह-इयादों के झरोखा में' ई तीनो पुस्तक के लोकार्पण उपस्थित अतिथीयन द्वारा भइल रहे।
इहां के हमेशा से एगो भोजपुरिया खातिर प्रेरणा आ मार्गदर्शक रहल बानी। भोजपुरी के कई गो विद्यार्थी, शोधार्थी लोग इहां से बहुत कुछ सीखले बा आ भोजपुरी साहित्य के सेवा कर रहल बा।
'घाम हऽ, धूर हऽ, पसीना हऽ!
जिंदगी जेठ के महीना हऽ!!
रात बरसात के लड़ी लागल!
बीच धारा फँसल शफीना हऽ।'
इहां के हम बारम्बार नमन करत आपन भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर रहल बानी।
----------------------------------
राजेश भोजपुरिया
लेखक-समालोचक 
राष्ट्रीय संयोजक, भोजपुरी जन जागरण अभियान
जमशेदपुर। 
सम्पर्क:- 9031380713


मैना: वर्ष - 7 अंक - 120 (अक्टूबर - दिसम्बर 2020)

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान (Maina Bhojpuri Magazine) Designed by Templateism.com Copyright © 2014

मैना: भोजपुरी लोकसाहित्य Copyright © 2014. Bim के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.