बतावल गइल बा - संदीप राज़ आंनद

कहाँ हमसे कुछऊ बतावल गइल बा
सही बात हरदम छुपावल गइल बा।

मोहब्बत के नागिन गइलि काटी के जब
जहर देके हमके जियावल गइल बा।

जवन आग सीना के भीतर लगेला
उ पानी से कहवाँ बुतावल गइल बा।

कहेके सुनेके न तनिको पता बा
इहे लूर तहके सिखावल गइल बा।

सभे लोग पागल भइल बा अनेरे
कहीं फिर से दारू लुटावल गइल बा।

ग़ज़ल गीत गावल कहाँ खेल हउवे
करेजा के एमन जरावल गइल बा।
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लेखक परिचय:-
संक्षिप्त परिचय - छात्र, स्नातक (हिन्दी साहित्य) इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय
प्रयागराज (उत्तरप्रदेश)
सम्पर्कसूत्र -7054696346
ग्राम - अहिरौली, पोस्ट - खड्डा
जनपद - कुशीनगर (उत्तरप्रदेश)

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