ए का हो कोरोना - दीपक तिवारी

ए का हो कोरोना जान लेइए के मनब
हमनी के दुख बोलs कहिया तू जनब।

सुनs तहरा चलते बड़ी घटा भइल बा
अब हमदर्द आपन रहत फइल बा।

मुहवाँ पर सबका लगवाई दिहल ढकनी
लउके ना केहू जहाँ जहाँ लें हम तकनी।

गइल सब बिलाई अइला से तहरा
फँसल बा लोगबाग मय सब बहरा।

खइलो प आफत पर गइल बाटे
सब बाटे दुखित अब के दुख बाटे।

मचवले बाड़s काहे ऊधम उपद्रव
रोज फइलत बाड़s कोरोना प्रद्रव।

कुछ साँस तs लs तू भइल ढ़ेर दिना
मरी जाई लोग अब खइला के बिना।

तहरा डरे डेरा गइल कुल्ह बाटे जहाँ
कवनो छूटल देश तू ना बाडs जहाँ।

तहरा नाँव के चरचा गली गली बाटे
नाँव सुनते ही लोग अँगुरी दाँते काटे।

कुछ हमनी प अबो तू करs रहम
जा जिए द कोरोना क के करम।
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लेखक परिचय:-
नाम: दीपक तिवारी
पता: श्रीकरपुर, सिवान








मैना: वर्ष - 7 अंक - 118-119 (अप्रैल - सितम्बर 2020)

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