उर्मिला - विद्या शंकर विद्यार्थी

तप कहल जाई तोहार कि आत्मा के आत्मग्लानि 
कहऽ उर्मिला अपने सबद में आपन कुछ कहानी 

राम के साथ लखन वन गइले हित तिकले भाई के 
ना अइसन चाहत रहे आ गलती ठहरइलन माई के 

माईके हठ बस हठ रहल आ भरत के भला तिकली
दसो बार समुझावल गइल आ दसो बार झिझकली

कैकयी के अपत तिक के भाई के साथ हो गइलन
बोलऽ उर्मीला बोलऽ आन प तोहरा के न छो गइलन

आन! कइसन आन कवि, मरद के मरदांव ह छवि
नारी बस नारी हई, नारी के ह बस वियोग के छवि? 
ठाढ़ रह गइल परतिछा में चउदह बरिस निमन ह
कवि, कनखियो से ना कुछ कहलन, भला निमन ह। 
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लेखक परिचयः
C/o डॉ नंद किशोर तिवारी
निराला साहित्य मंदिर बिजली शहीद
सासाराम जिला रोहतास ( सासाराम )
बिहार - 221115
मो 0 न 0 7488674912

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