परजा के निहोरा - विद्या शंकर विद्यार्थी

राजके बात राजे रहे दिहीं राजके बात दयानिधि मानीं 
माईके केहू कठोर कही त माईके रही ना पानी ई मानीं 

खाये के कहाँ अघाये के रहल पूरे भइल नूने नून मानीं 
रहे लिखल एतना होखे के एकरा के हरानी बस मानीं

भाई खाति भाई हहरऽता भाई के जात ग्लानि ना बाटे
माई के बात भुलाई कुल्ही वजह का कि भाई ना साटे

बात प तनी बिचारीं दयानिधि पाटीं खाई खाई के पाटीं 
माई के इज्जत माई के करीं हहरता भाई भाई के साटीं

बात के तीर लागल सभका बा आहत भइल सभे मानीं 
बोलऽत ना लिखत ना बाटे सोच में परल बाटे गेयानी 

कुसंग में जब केहू परेला त बुद्धि कुल्ही हेरा जाला 
आन के हाथ नाहीं आदमी अपनो के हाथे पेरा जाला 

एह फेरा के दूर कइल दयानिधि दूरदर्शिता बा राउर 
हमनी के परजा बानीं जा का कहब जा एह से आउर
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लेखक परिचयः
C/o डॉ नंद किशोर तिवारी
निराला साहित्य मंदिर बिजली शहीद
सासाराम जिला रोहतास ( सासाराम )
बिहार - 221115
मो 0 न 0 7488674912

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