चलीं! बात करे के - जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

मिलजुल सबही के ज़ेबा टटोले के हर बेमारी मे, काम सरकारी मे 
देहरी मे घुसि के, जबरी बोले के बिलात विकेट से बिखरल पारी मे 
सुने जे ना केहु त धइके झकोले के बड़की आन्ही से उजरल बारी मे 
चेहरा न खिली , घात करे के, मुद्दा न मिली, उतपात करे के। 
चलीं! बात करे के॥ चलीं! बात करे के॥ 

फूटल थरिया मे पड़ल निवाला के मेला - ठेला मे घर के झमेला मे 
चोरो - घघोटो मे टूटल ताला के चउक – चौबारा पर बढ़त बवेला मे 
देखिके बदनाम कवनों शिवाला के लूट मचल बाटे कूल्हि तबेला मे 
आँखियो लाल, साथ साथ करे के ॥ दियरी के संगे जज़बात धरे के । 
चलीं! बात करे के॥ चलीं! बात करे के॥ 

बदरी-बुन्नी मे भसल ओसारी के गाहे बगाहे होत रसते के लफड़ा से 
चिन्हल-जानल मे गइल उधारी के रोज-रोज चलत धरम के झगड़ा से 
मँगनी मे उपरल कवनो बेमारी के दान मे मिलल मलमल के कपड़ा से 
टेम अछते, कुजात करे के। इजत तोपे क शुरुवात करे के । 
चलीं! बात करे के॥ चलीं! बात करे के॥ 

बोझा कपारे क केकरो धराई के 
टाइम बेटाइम भइल खराई के 
झगरा मे दोसरा के अनही अगराई के 
धूरी मे रसरी बलात बरे के। 
चलीं! बात करे के॥ 
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लेखक परिचय:-
इंजीनियरिंग स्नातक;
व्यवसाय: कम्पुटर सर्विस सेवा
सी -39 , सेक्टर – 3;
चिरंजीव विहार , गाजियाबाद (उ. प्र.)
फोन : 9999614657
ईमेल: dwivedijp@outlook.com

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