ब्याकरण परिवार - तारकेश्वर राय 'तारक'

वर्णमाला, वर्तनी, अलंकार, छन्द, कारक
स्त्रीलिंग, पुलिंग, समास, आ बिंदी धारक।

ब्याकरण के इ त बड़हन परिवार बा
सजग रह पंचे ना त इ वार प वार बा।

"संज्ञा" बेटी हई परिवार में सबसे छोटकी
समझ ल ठीक से ना त होइ गलती मोटकी।

"भाववाचक" "जातिवाचक" कुल बान ढेर
माट्साब कूल्हे बुझवलन,ना बुझाइल एको बेर।

बेटा "बिशेषण" बतावेलन बिशेषता बहिन के
एके समझी जे मालिक बा निक जहीन के।

माई "क्रिया" के त कूल्हे इ काम बा
एकरा कोरा में त जइसे चारो धाम बा।

बाबू "सर्वनाम" क, ना कवनो माने होला
छव भाई इनकर सब इनकर जाने होला।

"कारक" बाबा के समझे में माट्साहबो पिटईलन
इनकर छव रूप सीखे में त कको हुकईलन।

चाचा "अब्यय" के बारे में गुरूजी खूब समझवलन
भाषा के समझे में होखी आसानी, इहे गुनवलन।

ब्याकरण के समझी पंचे निमक नियर
एकर अनुचित मात्रा कर दिहि सबके लाल पियर।

ब्याकरण परिवार से जे रह गईल अछूता
भाषा क उ रूप ना लउकी, चाहे लगा दी कवनो बूता।
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लेखक परिचय:-
सम्प्रति: उप सम्पादक - सिरिजन (भोजपुरी) तिमाही ई-पत्रिका
गुरुग्राम: हरियाणा

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