मंथरा के प्रेरना (राजा के घर फूटे के एहसास) - विद्या शंकर विद्यार्थी

बिना आग के डाढ़ा फेरलस लगाई देलस अगिया 
बिना आग के अगिया जराई देलस अगिया... ।

मंथरा के बुधिया लहकाई घर दिहलस 
मतिया कुमतिया उपजाई जर दिहलस 
राजा के जिनिगिया ना रानी के जिनिगिया। 

कहलो ना जाला चुप रहलो ना जाला 
अँखिया भइल बउए लोर के पियाला 
कुलवा में दगिया आ जिनिगिया में दगिया। 

परी कपारे जब जेकरा नू इहो जाला 
मति मराला अउरी नू बुधि सब हेराला 
दोसे के रही जाला बस अदिमी भगिया। 

गाँवो जानी गइल त जवारो जानी गइल 
कैकयी के कारन राम जी के वन भइल 
भइल बउए ढोवे के अब भारी ई दरदिया। 
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लेखक परिचयः
C/o डॉ नंद किशोर तिवारी
निराला साहित्य मंदिर बिजली शहीद
सासाराम जिला रोहतास ( सासाराम )
बिहार - 221115
मो 0 न 0 7488674912

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