दशरथ के संवेदना - विद्या शंकर विद्यार्थी

कइसे दियनवा के महिमवा घटाईं
सगरी अन्हरिया नगरिया में छाई।

दियवा के जोतिया नयनवा के हवन 
धन किसमतिया जीवनवा के हवन 
उन्हुका निकालीं कि अपना के सतायीं। 

अपना जमलका के बन कइसे भेजीं
अगिया अंगोरवा दिहलका के अंगेजी 
तुहूँ सोचऽ अइसन कबो होली ना माई। 

अन्हको जमलका के दरस ना माई
सोचऽ तूँ कैकयी मत होखऽ कसाई 
हमरो के बाप ना तोहरो के कही माई।

अपना जमलका के चिन्हल ना जाला 
दोसरो के बेटा के बिन्हल ना जाला 
जस आज अपजस के हाथे गोताई। 
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लेखक परिचयः
C/o डॉ नंद किशोर तिवारी
निराला साहित्य मंदिर बिजली शहीद
सासाराम जिला रोहतास ( सासाराम )
बिहार - 221115
मो 0 न 0 7488674912

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