गोबर के महादे' - दिनेश पाण्डेय

बड़ी रे रकटना से 
गढ़ल महादे' गोईं, 
बइठे देवल चढ़ि 
धइके गहिर ध्यान।

पान-फूल अछतो प 
पलक न खोले बौरा, 
आरजू मिन्नत कइ 
जियरा बा हलकान।

अपने गरज लागे 
छोड़ेले न पैंयाँ दैया,
हमरी गरज पर 
नाधि देले चउगान।

साँसति में लागे भोला, 
फँफरा में बड़बोला-
"चल री बछेरी मोरी 
काँटे-कुशे धाने-धान।"
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लेखक परिचय:-
नाम - दिनेश पाण्डेय
जन्म तिथि - १५.१०.१९६२
शिक्षा - स्नातकोत्तर
संप्रति - बिहार सचिवालय सेवा
पता - आ. सं. १००/४००, रोड नं. २, राजवंशीनगर, पटना, ८०००२३

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