किसनवा - गणेश नाथ तिवारी 'विनायक'

उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल
चारुओर चिडियन के चिहचीहान हो गइल।

उठ धरती मइया के चरण दबाव
दुअरा पर गइया के लेहना लगाव
दुधवा पी के बबुआ जवान हो गइल
उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल।

सांझे सवेरे रोज करेलऽ खेतीबारी
तबे कुल अनजा पहुँचेला दुआरी
देसवा एहीसे महान हो गइल
उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल।

केतनो उगइब तेलहन अउरी दलहन
मिली नाही तोहके रुपइया तनिको मोटहन
व्यवसायीयन के खूबे सकान हो गइल
उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल।

खेती के मोल जदि ऊँचीत ना भेटाई
बाल बच्चा हमार कइसे पोसाई
इहे सोचि के मन परेशान हो गइल
उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल।

नेता मंत्री के बढ़ल वेतन आ भाता
किसानन के कबो कुछ्वु ना भेंटाता
झूट नेतन के सगरो जबान हो गइल
उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल।

नइखे किसान के केहु पुछवाइया
नेता व्यापारी भा बाबू होखे भइया
अरजी करत गणेश के थकान हो गइल
उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल।

उठऽ उठऽ मोर किसनवा विहान हो गइल
चारुओर चिडियन के चिहचीहान हो गइल।
------------------------

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान (Maina Bhojpuri Magazine) Designed by Templateism.com Copyright © 2014

मैना: भोजपुरी लोकसाहित्य Copyright © 2014. Bim के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.