गुमसुम दुपहरी - डॉ. हरेश्वर राय

गहरान हमरा क्षोभ के अथाह हो गइल
सगी हमरी सरौती कटाह हो गइल।

गाँव से उजड़नी शहर में भूलइनी
हमरा दरद के कठौती कड़ाह हो गइल।

हमार रिश्ता टूटल फूल से गंध से
हमार सरगम बपौती तबाह हो गइल।

तनवा बा बंधुआ आ मनवा भी बंधुआ
हमार असमय बुढ़ौती गोटाह हो गइल।

गुमसुम दुपहरी आ गुमसुम गोरइया
हमरा डर के सिलौटी निठाह हो गइल।
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लेखक परिचय:-
प्रोफेसर (इंग्लिश) शासकीय पी.जी. महाविद्यालय सतना, मध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनी, जवाहरनगर सतना, म.प्र.,
मो नं: 9425887079
royhareshwarroy@gmail.com

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