आइ हो दादा - डॉ. हरेश्वर राय

सपना देखनीं भोरहरिया 
आइ हो दादा,
मुखिया हो गइल मोर मेहरिया 
आइ हो दादा।

हमरा दुअरा उमड़ रहल बा
सउँसे गाँव जवार, 
लाग रहल बा देवीजी के 
नारा बारम्बार, 
डीजे बाजता दुअरिया 
आइ हो दादा।

ढोल नगाड़ा बाजे लागल 
जुलुस निकलल भारी,
आगे आगे नवका मुखिया 
पीछे से नर नारी,
बड़ुए मध दुपहरिया 
आइ हो दादा।

चौकठ-चौकठ घूमे लगली
नवा नवा के सीस, 
बड़ बुढ़न से माँगत गइली 
अपना के आसीस,
गोड़ प ध ध के अंचरिया 
आइ हो दादा।

उनकर पीए हो गइनी हम 
दून भइल मोर सान,
आगा पाछा घुमत बानी 
सुबह से लेके साम,
छोड़ के खेत आ बधरिया
आइ हो दादा।
-------------------------
लेखक परिचय:-
प्रोफेसर (इंग्लिश) शासकीय पी.जी. महाविद्यालय सतना, मध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनी, जवाहरनगर सतना, म.प्र.,
मो नं: 9425887079
royhareshwarroy@gmail.com

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

मैना: भोजपुरी साहित्य क उड़ान (Maina Bhojpuri Magazine) Designed by Templateism.com Copyright © 2014

मैना: भोजपुरी लोकसाहित्य Copyright © 2014. Bim के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.