कुलवांसी - लव कान्त सिंह

ओइसे त बांसडीह बाजार पर चाय के कईगो दोकान बा। बाकी विजय चाय दोकाने के नाम जवार में फेमस बा। चाय के दोकान के मतलब खाली चाय दोकाने ना होला, ओकर माने होला राजनीति, समाज, अर्थव्यस्था, इतिहास आउर देश-दुनिया पर चर्चा करेके अड्डा। आज जवन टीवी डिबेट आ रेडियो डिबेट आ रहल बा ओकर अविष्कार चाय के दोकान पर से भइल रहे। कई बेर तऽ चाय के मिठाई भुला के लोग आपसी खटाई भी बढा लेवेलें। 

चाय के चुस्की लेत दामोदर सिंह कहलें - 'हं त अबकी के चुनाव में माजा आ जाई , जिन माई समीकरण बना के वोट खातिर समाज के बाँटल आज ओकर आपन घर बंटाए पर आ गइल बा।'

रहमान मियां चुपचाप मुड़ी गड़ले चाय पिये में व्यस्त देखावे के कोशिश में रहलें ताले संजय यादव चाय खत्म कs के गिलास राखत कहलें-'ए भाई बाकी अबकी के चुनाव में जातिवाद के बोलबाला ना रही।'

'बाक मरदे कवना चुनाव में जातिवाद के बोलबाला ना रहेला, बिना जाति देखले बियाह हो जाता बाकी वोट दियाता त जातिये पर'- भुअर ठाकुर कहलें त बहुत लोग सहमति दर्ज करावल। 

दामोदर सिंह बात आगे बढावलें-' अब देखs पिछले बेर चोकर बाबा के जितावल रहे बाकी मार्दवा एगो चंपाकल कल तक ना लगवलस दोसर विकास के का कहल जाओ। सड़को रहे त पांच साल पहिलहीं बनल रहे इनका टाइम में मरम्मतो ना भइल।'

रहमान मियां भी बोलले- विकास के नाम पर आईल रहलें बाकी विकासो के नाम हंसवा देहलें, अब ई ना अइहें।'

बातचीत होते रहे ताले फलिन्दर मिसिर सायकिल के लंगड़ी पर खड़ा कर के विजय चाय आला से कहलें-' बाबू हई ल s गिलास एगो चाय हमरो के दs। का बतकही चल रहल बा बाबू साहेब?' दामोदर सिंह कहलें की इहे सब राजनीति आउर का होई।'

मिसिर जी तुनक के कहलें-' बे महाराज का फजिरे-फजिरे राजनीति के बात शुरू कर देहनी, केतनो बतियाएम त का ई यादव लोग जब वोट दी त यादवे के दिही। एह लोग के दम पर हमनी के एगो निरच्छर मुख्यमंत्री मिलिए गइल अब नावां फेल मुख्यमंत्री देवे के फेरा में बा लो। कुछु कहला के फायदा नइखे ई लोग काम देख के ना जाते देख के बटन दबाई लो।' यादव जी के मन त करत रहे कुछ कहस बाकी रहमान मियां हाथ दबा देहलें।

दामोदर सिंह चाय के कप राखत निराशा से हामी में मुड़ी डोलवलें। मिसिर जी भी फूंक-फूंक के चाय के शुरुआती चुस्की लेत कहलें-' जातिवाद जवन बा नु ई विशानक कीड़ा बनके समाज के भीतरे-भीतरे खोंखर कर रहल बा। जल्दी एहपर माटीतेल ना डालल जाए त ई पूरा सामज के लय कर दीं।'

सभे उनका आदर्श विचार के सराहना कयलक ताले भुअर पुछलक -' तब बाबा अबकी राउर वोट केने जाई?'

मिसिर जी चाय घोंटत कहलें-' जाई केने भुअर, चोकर तिवारी बारें हमनी के नेता।'

दामोदर सिंह आ भुअर के मुस्कि भरल नजर मिलल आ भुअर मुस्किया के कहलें-' हं त बारी के बारी कुलवांसिये बा।'
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(रंगकर्मी आ पत्रकार)










मैना: वर्ष - 7 अंक - 117 (जनवरी - मार्च 2020)

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