आकाश महेशपुरी के सोलह गो कविता

कच कच कच कच बोले सन

अचरज बा कि तहिए मनई चार गोड़ के हो जाला
शादी क के जहिए से घर के झंझट मेँ खो जाला।

दू गो लइका हो जेकरा उ आठ गोड़ से चलेला
जाल बढ़े मकरा जइसन त शादी कइल खलेला

बड़ा काम कइसे होई जब छोटी छोटी मुश्किल बा
समय चलत महँगाई के अब रोजी-रोटी मुश्किल बा

अइसे मेँ जब लइका सुन लीँ पाँच-पाँच गो होले सन
पेट भरे ना भाई हो तब कच कच कच कच बोले सन

जहिया कवनो कारन से ना तेल परे तरकारी में
राज गरीबी के सगरी उ खोले सन पटिदारी में


सगरी जिनिगी बितेला तब भाई मारा-मारी में
जगहि मिले ना घरवा मेँ त सूतेक परे घारी में

देखते बानी रोग बहुत बा पइसा लगी बीमारी में
मान्टेशरी में पढ़िहे सन ना पढ़िहे सन सरकारी में

अनपढ़ रहिहें सन लइका फसिहें सन दुनियादारी में
खोजला में बस जिनिगी कटी दाल-भात-तरकारी में

जाके कवनों करी मजूरी भाई हाट-बजारी में
कवनो कही हम त बानी बाहर के तइयारी में

शादी सगरिन के होई त घर रही ना रहे के
बटवारा होई त सुन लऽ खेत बची बस कहे के

बड़ा अगर परिवार रही त सबकुछ परी सहे के
लाठी ले के बुढ़ौती मेँ येने ओने ढहे के

छोटा बा परिवार अगर त चिन्ता चढ़े कपारे ना
शान रहे मनई के कहियो ये दुनिया से हारे ना
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एतनो मति बनऽ तूँ भोला

चढ़े कपारे अगर गरीबी
दुख पहुँचावे पहिले बीबी

पटिदारन के खूब टिभोली
ऊपर से मेहरी के बोली

राशन-पानी के परसानी
याद करावे नाना-नानी

पाँव उघारे देहीँ दामा
फाटल चीटल पायट जामा

अइसे मेँ मड़ई जब टूटे
मनई बसवारी मेँ जूटे

बाँस खोजाला सीधा सबसे
सीधा के जग लूटे कबसे

सीधा होखे चाहे भोला
रोज रिगावे सँउसे टोला

गारी दे केहू हुमचउवा
बाड़ऽ बड़ी दुधारू चउवा

लोगवा दूही गरबो करी
बात बात मेँ मरबो करी

बिना जियाने पकड़ी लोला
येतनो मति बनऽ तूँ भोला

सीधा के तऽ लोगवा कही
गाई-बैल हऽ सबकुछ सही

कि केहू कही क्रेक हवे ई
बुद्धी के तऽ ब्रेक हवे ई

नट बोल्ट ढीला बा एकर
गदहा असली हउवे थेथर

मीलल जब बुद्धी के कोटा
एकरा बेरी परल टोटा

कि पावल सभे भर भर बोरा
ये के मीलल एक कटोरा

बुद्धी के बैरी ई हउवे
ये से तऽ नीमन बा कउवे

कि झुठको बतिया बुझबऽ सही
तहरा के लोग भादो कही

फायदा सभे उठावल करी
जीअहूँ दी ना एको घरी

मीठ-मीठ तहसे बतिया के
चाहे लाते से लतिया के

कोड़ी कहियो तहरे कोला
एतनो मति बनऽ तूँ भोला

अपना के छोटा मति जानऽ
भाई खुद के तूँ पहिचानऽ

ई दुनिया बा बड़ा कसाई
कमजोरे प लोगवा धाई

तहरा पर जे आँख उठाई
ओ से तूँ डरिहऽ मति भाई

बनि जइहऽ तूँ धधकत शोला
भाई मति बनिहऽ तूँ भोला
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दारू के खतिरा भागेला

कइले बा उ एतना देरी
करत होई केनहो फेरी

मित्र मण्डली मयखाना मेँ
होइहेँ सँ चाहे थाना मेँ

बाटे ओकर अजब कहानी
कि सुनीँ सभे सुनावत बानी

दुनिया मेँ का नाव कमाई
हवे छुछेरा घाव कमाई

पी के झगरा फरिआवेला
हीक हीक भर गरिआवेला

ओ के भीतर बाटे बूता
डटल रहेला खा के जूता

पनडोहा मेँ गीरे जा के
दाँत चिआरे नहा नहा के

मउगी गुरना के बोलेले
राज सजी ओकर खोलेले

बिखियाला पीटे लागेला
मिले जवन छीँटे लागेला

हार बेचि पीयेला दारू
छाती पीटेले मेहरारू

बदबू अजबे निकले तन से
राखे ओके बड़ी जतन से

जे ओकरा लगे आवेला
नाक दबा के मुँह बावेल

जहिया भर पेटा पी लेला
जिनिगी से बेसी जी लेला

बेहोशी जब चढ़े कपारे
जगा जगा सब केहू हारे

गाँथे खातिर सूई आवस
डाक्टर तहिया बहुते धावस

ओ के बहुत बहुत समझावस
बन्द करऽ तूँ दारू पीयल

करेजा मेँ क दी ई बीयल
जवना के मुश्किल बा सीयल

तबो बिहाने जब जागेला
दारू के खतिरा भागेला
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माल हवे सरकारी खा तूँ

सुननी कुछ लो के बतिआवत
दुखी के घरवा रहे दावत

कुछ लोग रहे शोर मचावत
मुखिया रहलेँ बात सुनावत

बड़ी भागि से मीलल बा रे
परधानी तूँ मिल के खा रे

खइला से ना तनिक लजा तूँ
माल हवे सरकारी खा तूँ

जब आवास केहू क दीले
कइ हजार ओसे हम लीले

जवन गाँव के बाटे कोटा
धन मीले उँहँवोँ से मोटा

कर्मि सफाई से टानीले
बिन पइसा के ना मानीले

राशन काड बनावे खातिर
धन पाईले धावे खातिर

सबसे बेसी मनरेगा से
लाखन पाईँ कवनोङा से

इस्कूली से मोट कमाईँ
भोजन से हम नोट कमाईँ

सबका माथे ताज न आवे
असली मुखिया बाज न आवे

येही से हम बाज न आईँ
झगरा लगा लगा फरिआईँ

झगरवो से झरेला खूबे
येतना कि लागीले डूबे

डूबीँ फेरू उतराईले
दौलत कि येतना पाईले

विधवा अउर बूढ़ के पेन्सन
लूटे मेँ तनिको ना टेँसन

हम चानी आधा काटीले
आधा मेँ सबके बाटीले

बाँट बाँट के खइले बा लो
हमसे बेसी धइले बालो

दिल्ली से गउँवा ले भाई
चाँपत बाटे लोग मिठाई

बेसरमी के मेला लागल
हमरो बेसरमी बा जागल

हम चुनाव मेँ कइनी फेरा
खूब खिअवनी लड्डू केरा

साड़ी अउर बटाइल मछरी
भइ जीत बानी डेढ़ अछरी

दारू अउर मास के रेला
आईल रहे कइ कइ ठेला

पइसा दे भरमवले बानी
पद पर पाँव जमवले बानी

जमल रही आ जमले बाटे
कुर्सी हमके बन्हले बाटे

चमचा लो के रही सहारा
पँचवेँ पँचवेँ मिली किनारा

सबके दारूबाज बनाके
राखब आपन ताज बचा के

गउँवा मेँ जे रही अशिक्षा
बाकी रही न एको इच्छा

गाँवे रही गरीबी भाई
कईल बनी खूबे कमाई

जे जे सूनल मुखिया बानी
भरलि आँखि मेँ ओकरा पानी

हाय देव हे देवी माई
धरम कहीँ अब लउकत नाहीँ

लूट-लूट जे मनई खाता
करऽ न्याय अब सुनऽ विधाता
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का कहीँ लोर के

जिन्दगी मेँ जहर बा गइल घोर के
बन्द होते न बा का कहीँ लोर के

ना ये पार मेँ ना तऽ ओ पार मेँ
ई जुदाई भइल उहो मजधार मेँ

दोष हमरे रहे आकि चितचोर के
बन्द होते न बा का कहीँ लोर के

बेवफाई के देखऽ कइले बा हद
बस इहे सोच के दिल मेँ उठे दरद


जे जोरल उहे अब तूरल डोर के
बन्द होते न बा का कहीँ लोर के

ई खा के कसम आ खिया के कसम
कि दी ना कबहू प्यार मेँ केहू गम

खूँन कइले बलम बा पोरे पोर के
बन्द होते न बा का कहीँ लोर के
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जिनिगी के नइया

जिनिगी के नइया डूबल जाले लोरवा मे
लोरवा के नइखे ओर छोर रे खेवइया

सपना बीखरि गइलेँ अगीया मेँ जरि गइले
किस्मत फाटल जइसे फाटे रे बेवइया

सबका के जिनिगी भर बहुते सतवनी हम
दुख भइल हमरा के होई रे सहइया

अब पछतइला से कुछउ त मीली नाही
आई नाहीँ फेरू जवन बीतल रे समइया

बिहने ये दुनिया से जाये के लिखल बाटे
काम नाहीँ करी बैदा तोर रे दवइया

छुटि जाई खेत बारी छुटि जइहेँ पूत नारी
उड़ि जइहेँ सब पारा पारी रे चिरइया
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केहू नइखे दुनिया में माई के तरे

केहू नईखे दुनिया मेँ माई के तरे
काहेँ तूँ सतावेलऽ कसाई के तरे

जर लागे बथे कपार चाहेँ गड़े पेट
धावल जाली बैद लगे करेली ना लेट

सुनऽ भाई होली माई दवाई के तरे
काहेँ तूँ सतावेलऽ कसाई के तरे

रहलऽ तूँ छोटी चुकी माई धोवली धूल
ओही माई खातिर तूँ बोवऽ तार शूल

तबो माई बोलेली मिठाई के तरे
काहे तूँ सतावेलऽ कसाई के तरे

जड़वा मेँ ओढ़े खातिर रहे ना चादारा
तबो ये भाई जाड़ लागल ना ताहारा

हऽ माई के गोदिया रजाई के तरे
काहे तूँ सतावेलऽ कसाई के तरे
केहू नईखे दुनिया मेँ माई के तरे
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पी के घुमे बाजार

पी के घुमे बाजार तऽ ओकर जोश जागेला
गीरेला केतनो मार ना चढ़ल भूत भागेला

पी के झगरा फरिआवेला
हीक हीक भर गरिआवेला

मानेक परी बाटे बूता
डटल रहेला खा के जूता

आ कुर्ता लेला फार तऽ ओकर जोश जागेला
गीरेला केतनो मार ना चढ़ल भूत भागेला

मउगी जे तनिको बोलेले
दारू पियला से रोकेले

पागल हऽ लागेला पीटे
गहना-बीखो सगरी छींटे

बेचेला कंगन हार तऽ ओकर जोश जागेला
गीरेला केतनो मार ना चढ़ल भूत भागेला

पी लेला तऽ धावे लागे
गीत उरेबी गावे लागे

चलेला हरदम अङ्हुआ के
गीरेला मोरी में जा के

पाँको से पावे प्यार तऽ ओकर जोश जागेला
गीरेला केतनो मार ना चढ़ल भूत भागेला

बदबू जेतना आवे तन से
राखे ओके बड़ी जतन से

समझावे केहू आवेला
उल्टी करे मुँह बावेला

आ कर देला बीमार तऽ ओकर जोश जागेला
गीरेला केतनो मार ना चढ़ल भूत भागेला

जहिया भर पेटा पी लेला
जिनिगी से बेसी जी लेला

पूरा देहिये हो जा पीयर 
हो जाला ऊ मुर्दा नीयर

कि सुई घोपाला चार तऽ ओकर जोश जागेला
गीरेला केतनो मार ना चढ़ल भूत भागेला

सगर खेत बगइचा बेचलस
दारू में अइसन का देखलस

मुँवे के माहुर खोजेले
मेहरारू रोजे रोवेले

आ लइका करें चिघार तऽ ओकर जोश जागेला
गीरेला केतनो मार ना चढ़ल भूत भागेला
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आइल दिन जाड़ा के

आइल दिन जाड़ा के आइल दिन जाड़ा के
देहिया रहेला कठुआइल आइल दिन जाड़ा के

ठंडी परअ ताटे क के तइयारी
भगिया के मारल का करे दुखियारी

जाड़ का रोकी फाटल लुगरी
लइका बेमार ना साल बा ना गुदरी

डाक्टर कहेला कि भइल निमोनिया
माई के जिया घबराइल- आइल दिन जाड़ा के

बूढ़-पुरनिया के रोग बढ़ल बा
जबसे अगहन मास चढ़ल बा

कुहा सितलहरी परे येतना भारी
रुकल जहाज रुकल रेलगाड़ी

येइमें किसनवा पटवेला खेतवा
धरती के भागि फरिआइल- आइल दिन जाड़ा के

चिरई-चुरुङ्ग के हाड़ लागे काँपे
काँपेला ऊहो जे कउड़ा तापे

पेड़वो के मारे लागल अब पाला
मरि गइलें मँगरू भइल बाटे हाला

सीमावा प तबो डटल बा जवनवा
सुनि सुनि हिया हरसाइल- आइल दिन जाड़ा के
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जाल बढ़े मकरा जइसन त शादी कइल खलेला

अचरज बा कि तहिए मनई चार गोड़ के हो जाला
शादी क के जहिए से घर के झंझट मेँ खो जाला

दू गो लइका हो जेकरा उ आठ गोड़ से चलेला
जाल बढ़े मकरा जइसन त शादी कइल खलेला

बड़ा काम कइसे होई जब छोटी छोटी मुश्किल बा
समय चलत महँगाई के अब रोजी-रोटी मुश्किल बा

अइसे मेँ जब लइका सुन लीँ पाँच-पाँच गो होले सन
पेट भरे ना भाई हो तब कच कच कच कच बोले सन

जहिया कवनो कारन से ना तेल परे तरकारी में
राज गरीबी के सगरी उ खोले सन पटिदारी में

सगरी जिनिगी बितेला तब भाई मारा-मारी में
जगहि मिले ना घरवा मेँ त सूतेक परे घारी में

देखते बानी रोग बहुत बा पइसा लगी बीमारी में
मान्टेशरी में पढ़िहे सन ना पढ़िहे सन सरकारी में

अनपढ़ रहिहें सन लइका फसिहें सन दुनियादारी में
खोजला में बस जिनिगी कटी दाल-भात-तरकारी में

जाके कवनों करी मजूरी भाई हाट-बजारी में
कवनो कही हम त बानी बाहर के तइयारी में

शादी सगरिन के होई त घर रही ना रहे के
बटवारा होई त सुन लऽ खेत बची बस कहे के

बड़ा अगर परिवार रही त सबकुछ परी सहे के
लाठी ले के बुढ़ौती मेँ येने ओने ढहे के

छोटा बा परिवार अगर त चिन्ता चढ़े कपारे ना
शान रहे मनई के कहियो ये दुनिया से हारे ना
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तहरे प सब कुरबान करऽतानी

तहरे प सब कुरबान करऽतानी
येहितरे जिनिगी जियान करऽतानी
काटि काटि लिखनी तऽ घाव गहरे बा
येह रे करेजवा पर नाव तहरे बा

रोजे रोज केतना निशान करऽतानी
येहितरे जीनिगी जियान करऽतानी
कबो कबो खाईं कबो कटि जा उपासे
रात भर रोईं दिन कटि जा उदासे

पार रोजे गाँव के सिवान करऽतानी
येहितरे जिनिगी जियान करऽतानी

नीक नाहीं हवे प्यार तबो नीक लागे
खुद के बिसारि दीहनी हम तहरे आगे
जागि जागि जागि के बिहान करऽतानी
येहितरे जिनिगी जियान करऽतानी
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दुनिया में कहे खातिर बहुते इयार

दुनिया में कहे खातिर बहुते इयार
इहाँ केहू केहू हो
करे दिलवा से प्यार
इहाँ केहू केहू हो

मिसिरी मलाई नियर लोग बतिआवेला
उपरा से फूल तरे मुसुकी लगावेला
मनवा में रखले बा बाकिर कटार
इहाँ केहू केहू हो

अपने गरज से इयारी करे दुनिया
माहुर मिलाई के खिआई देला बुनिया
हँसेला लोग फेरु खोतवा उजार
इहाँ केहू केहू हो

धन रही लगे बड़ी मिलिहें संघतिया
हाथ होई खाली उहे सुनिहें ना बतिया
पूछहु ना अइंहें भले जइबऽ सिधार
इहाँ केहू केहू हो
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कटलो से ना कटे जीनिगी

कटलो से ना कटे जीनिगी भार हो गइल
जबसे काठ करेजा वाली से बा प्यार हो गइल

दिल देके हम तड़पत बानी चैन तनिक ना आवे
जे के खुश देखल चाहीले उहे रोज रोवावे
राह ना सूझे चारु ओर अन्हार हो गइल
जबसे काठ करेजा वाली से बा प्यार हो गइल

जिनके पुतरी में रखनी हम आपन जान बना के
ऊहे रोज तमाशा देखस दिल में आग लगा के
ऊहे ले ना बैरी तअ संसार हो गइल
जबसे काठ करेजा वाली से बा प्यार हो गइल

जेकरा के हम फूल समझनी बनल उहे अंगार
बार-बार पछताला जियरा काहें कइनी प्यार
सोच सोच के जीयल बा दुस्वार हो गइल
जबसे काठ करेजा वाली से बा प्यार हो गइल
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ये बाबू कायल हो जइबअ

दुनिया चली अइसन चाल 
ये बाबू कायल हो जइबऽ
सचको बतिया कहब 
सुन ल घायल हो जइब

बाड़े सं रिश्वत खोर
तबे त पोसेले सं चोर
होखे द जवन होता
काहें करेलअ तू शोर
खींचे लागिहें सं खाल
ये बाबू कायल हो जइब॥

केहू लूट लूट के खाला
केहू कुर्सी पर सुस्ताला
खाली लउकत बा घोटाला
बाकिर मुहँ पर रहे ताला
खोलबअ त होई काल
ये बाबू कायल हो जइब

काम जवन सरकारी होता
साँचो बस बेगारी होता
बेवस्था जेतना कुल बाटे
येइमें रोज बीमारी होता
मत पूछअ तू येकर हाल
ये बाबू कायल हो जइबऽ।

विभागन के चोरी देख
बढ़ल कमीशनखोरी देख
जुटल बा चोरवन में नाता
टूटल ईमान के डोरी देख
पसरवलें सन ई जाल
ये बाबू कायल हो जइबऽ।


कुछे लोगवा के चानी बाटे
लउकत बस परेशानी बाटे
कंगालन के लूटे ले सन
ना शरम ना पानी बाटे
चाँपे सन ई माल
ये बाबू कायल हो जइबऽ।

सरकारी से काम चली ना
के बाटे जे हाँथ मली ना
बेचे ले सन राशन पानी
येकनी आगे दाल गली ना
करिये बा पूरा दाल
ये बाबू कायल हो जइबऽ।

अर्जी दी के कुछ ना पइब
सुन ल बाबू केतनों धइब
कर्मचारिन के कुछ ना होई
केतनो दुख आपन तू गइब
अधिकरिए बनिहें ढाल
ये बाबू कायल हो जइबऽ।
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दुख सहीले किसान हँईं

जोगअवले हम ईमान हँईं
कर्ज से परेशान हँईं
दुख सहीले किसान हँईं।

सबके बोझ उठाइले,
घामें देहि जराईले,
हम खाईं चाहें ना खाईं,
सबके खूब खियाईले,
हम देशवा के पहिचान हँईं,
जन जन के मुस्कान हँईं
दुख सहीले किसान हँईं।

उठते हर उठाईले,
कबो ना सुस्ताईले,
काम ना ओराला कबो,
तबो ना अगुताईले,
समझ में नाहीं आवेला,
मशीन हँईं कि इंसान हँईं
दुख सहीले किसान हँईं।

कबो बाढ़ फसल बहावेला,
कबो सूखा आगि लगावेला,
कबो जरे अनाज खरिहाने में,
कबो कर्जा पीर बढ़ावेला,
सभे बा धनवान इहाँ,
हम तअ पइया धान हँईं
दुख सहीले किसान हँईं।

करमें के विश्वासी हम,
आराम नाहीं जोहीले,
पेट पीठ में सटले रहे,
तबो बोझा ढोईले,
हम गरहन लागल चान हँईं,
ढहल मड़ई पुरान हँईं
दुख सहीले किसान हँईं।
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पुरइन के पतई

दाली में नेह समाइल आ भाते में प्यार सनाइल हो
ऊ याद बहुत आवेला पुरइन के पतई पर खाइल हो।

नाश्ता में सेव चले केरा बुनिया बरफी लड्डू गाजा
अंगूर रहे चिकन चिकन नमकीन चले ताजा ताजा।

कोशा के जल के शीतलता बा जाने कहाँ भिलाइल हो
ऊ याद बहुत आवेला पुरइन के पतई पर खाइल ह॥

नीचे एके गो पाँती में लोगवा सब के बइठावल जा
परवल के सब्जी दही भात दाली में घीउ चलावल ज…

पापड़ में प्रेम रहे येतना मन खुश हो जा मुरझाइल हो
ऊ याद बहुत आवेला पुरइन के पतई पर खाइल हो।

अब हाथे हाथे थाली ले येने ओने सब धावेला
आ खुद से सभे परोसेला पूछे ना केहू आवेला।

बिन पानी भोजन खड़े खड़े कइसन रिवाज उपराइल हो
ऊ याद बहुत आवेला पुरइन के पतई पर खाइल हो

आवे जब नाच लगे जमघट आ खूबे मौज मनावल जा
ना तनिको रहे दुराव कहीं बस खाली नेह लुटावल जा

आरकेस्टा आवेला अब त मनवा रहे डेराइल हो
ऊ याद बहुत आवेला पुरइन के पतई पर खाइल हो

जनवासा शिष्टाचार मिलन शादी के रसम निभावल जा
बाराती लो के स्वागत में गारी सनेह के गावल जा

अब डी जे वाली झगरा में बा थाना सउँसे आइल हो
ऊ याद बहुत आवेला पुरइन के पतई पर खाइल हो

जब होत सबेरा दही जिलेबी चिउरा साथे पावल जा
आ कहीं कहीं मरजाद रहे दू दिन ले मज़ा उठावल जा

अधरतिये के जाये खातिर अब लोग रहे अगुताइल हो
ऊ याद बहुत आवेला पुरइन के पतई पर खाइल हो
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लेखक परिचय:-
नाम: वकील कुशवाहा 'आकाश महेशपुरी'
जन्म तिथि: २०-०४-१९८०
पुस्तक 'सब रोटी का खेल' प्रकाशित
विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित
कवि सम्मेलन व विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मान पत्र
आकाशवाणी से कविता पाठ
बेवसाय: शिक्षक
पता: ग्राम- महेशपुर,
पोस्ट- कुबेरस्थान
जनपद- कुशीनगर,
उत्तर प्रदेश
मो नं: 9919080399
मैना: वर्ष - 7 अंक - 117 (जनवरी - मार्च 2020)

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