विद्या शंकर विद्यार्थी के दसगो कविता

केहू के केहू इहँवा चिन्हात नइखे

थाह चले लागल लोग बदले लागल
केहू के केहू इहँवा चिन्हात नइखे
घर डाहे से लोगवा सिहात नइखे।

केहू छतवे से झांके सड़किया के ओर
चाहे जानल ना काहे बा नयना में लोर
केहू केहू के इहँवा सोहात नइखे।
घर डाहे से लोगवा सिहात नइखे॥

केहू खोंखत नइखे केहू बोलत नइखे
कंठ चाहीं खोले के तऽ खोलत नइखे
केहू के केहू इहँवा जोहात नइखे।
घर डाहे से लोगवा सिहात नइखे॥

लइकी के लोग चिड़िया समुझत बाटे
खास आबरु के आबरु बस बुझत बाटे
केहू के केहू इहँवा मोहात नइखे।
घर डाहे से लोगवा सिहात नइखे॥

साँझ के झोली परते राह रूक जात बा
हिफाजत के भय से लोग छुप जात बा
केहू के केहू इहँवा सोहात नइखे।
घर डाहे से लोगवा सिहात नइखे॥
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बाँस के बहँगिया जोहत बाटे बटिया

आवऽ आवऽ सँइया आवऽ बहरा से घरे
छठिया बरत तुहूँ करे,
भुईंया परी संझवत करे, अरघ देबे भिनसहरे, छठिया...।

मिलिजुल कइल जाई दुनहूँ परानी
पोखरा के तीथा लिपइले हम बानी
कद्दू परसाद भात नेवान पहिले करे, छठिया...।

बिसवत सुरूज देव के गोड़ लागल जाई
रतिया में दया करिहें देखिहऽ छठी माई
बोलिहें चुचुहिया खोंतवा में भिनसहरे, छठिया...।

कले कले पनिया में झलकी किरिनिया
तवने घरी अरघ परी सँवरी जिनगनिया
बड़ के आशीष लेबे छोट के नेह करे, छठिया...।

बाँस के बहँगिया जोहत बाटे बटिया
बाटे उदासल पिया गँउआ के मटिया
छठ के मलाल लेइके अँसुआ टघरे, छठिया....।
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गाँवे चलीं जा

गाँवे चलीं जा गाँवे चलीं जा
चरे हरियरी गाँवे चलीं जा
रहल ना चुप फागुन में जाला,
हँसे चलीं जा हँसावे चलीं जा,
चरे हरियरी गाँवे चलीं जा॥

टूसा टुसाइल बा ढेंढ़ी बा लागल
फुलन पऽ तितिली के डेढ़ी बा लागल
आवता हवा आ हिलावता हवा
अँचरा से गमछा मिलावता हवा
हँसी में कनखी ठिठोली में कनखी
बात बात में कनखी मुलकात बात में कनखी
पोसत बिया अँखिया चोन्हा बात में कनखी
चना पर कनखी मटर पर कनखी
तीसी बिया कि मारत बिया कनखी
सरसो फुलाइल आ बधार पिअराइल
खेसारी के साग भात प नेवता दिआइल
पटे चलीं जा पटावे चलीं जा,
गाँवे चलीं जा गाँवे चलीं जा
चरे हरियरी गाँवे चलीं ...॥

अहरा के पानी आ पोखरा के पानी
आदमी के पानी आ आँखी के पानी
गइल पानी त रहल नाहीं पानी
पानी के पानी ह पानी निशानी
गेहूम के पटवन आ पटवन के पानी
लइकन के पानी आ बूढ़वन के पानी
ऊखी के सरबत पिआवे चलीं जा
गाँवे चलीं जा गाँवे चलीं जा
चरे हरियरी गाँवे चलीं जा ...॥

दलानी के पानी खरिहानी के पानी
चुरा के पानी आ चबेनी के पानी
अँगना के पानी आ चुहानी के पानी
गगरी के पानी आ पगरी के पानी
जुरला के पानी ना जुरला के पानी
लूर के पानी आ सहूर के पानी
बचावे चलीं जा बचावे चलीं जा
गादा के दाल भात बचावे चलीं जा
गाँवे चलीं जा गाँवे चलीं जा
चरे हरियरी गाँवे चलीं जा....॥

खइनी बाटे बाकि मांगता चुना
किनब चुनौटी छोड़ब जब पूना
सस्ती के चूना आ महंगी के चूना
शहर के तऽ चाहीं चुनौटी नमूना
लइका के चाह ह चाहीं खिलौना
खटिया के मजा ह लेवा बिछौना
बाबू के लेवा आ माई के लेवा
कहत का बाटे सोचीं तीन खेवा
घामा में फेंकल बा फेंकल सोन्हाता
महकल ना जाता एतना गन्हाता
मजबूरी के लेवा के कथा कहानी
जाड़ा में पलाला ओढ़े सेही जानी
पुअरा के गरमी पाके गरमाला
रेह के माटी से बने त फिंचाला
माटी के बोरसी बोरसी के आलु
धिपल खप्पड़ी खप्पड़ी के बालू
भुंजल चबेनी के तिकत बा डाली
भेली बा गुर के बोलावत बा हाली
पसर भर डालीं भा मुट्ठी भर डालीं
हाली हाली ना धीरे धीरे पगुरा लीं
आदर के खटिया आदर के तकिया
लुगा के तकिया आ पेवन के तकिया
नेह के तकिया आ छोह के तकिया
साली के भेजल ससुरारी के तकिया
बाधी के खाटी में बाधी के ओरचन
शहर छोड़ीं जा अब शहर के लोचन
फाटल बेवाय के ततावे चलीं जा,
गाँवे चलीं जा गाँवे चलीं जा
चरे हरियरी गाँवे चलीं जा ....॥

गाँवे के माटी आ माटी के फगुआ
गाँवे के भउजी आ गाँवे के लगुआ
चलेला इशारा तऽ नाचेला बुढ़वा
फेंकते धूर मातर कुलांचेला बुढ़वा
गदहा के पोछीं में कनस्तर बन्हाला
भागेला गदहा त कनस्तर ढनढनाला
चलेला मसखरी आ चलेला गारी
लागेला सवदगर जइसे तरकारी
गाला के मोजर राति खाँ चोरा के
समत में डलाला इयार के भोरा के
फूँके अश्लील गीतन के होलरी
होरी ह होरी आ होरी ह होलरी
खदेरन के होलरी बसावन के होलरी
पियारी के होलरी बरियारी के होलरी
चतुर के होलरी होशियारी के होलरी
चोन्हर के होलरी बकचोन्हर के होलरी
फगुआ के सुमिरन उठावे चलीं जा
गाँवे चलीं जा गाँवे चलीं जा
चरे हरियरी गाँवे चलीं जा ...॥

बधारी में घूमे आ कियारी में हेले
आनो के खेत में इयारी में हेले
खेसारी के टूसा प लहसुन के माजा
लतर के तुरल ढेंढ़ी ताजा ताजा
रूसा रूसी से बेशी हाहा हीही
गुदगुदावे भला केहू कइसे ना दिही
फरहर होई से खेसारी में दउरी
छुटा साँढ़ नियन बधारी में दउरी
रंग में दउरी आ रंगदारी में दउरी
सरसो के खेत में कियारी में दउरी
इयारी में जुटी आ इयारी में कूटी
लंगी जब मराई त इयारी में उठी
फगुआ में गुली सुँघावे चलीं जा
गाँवे चलीं जा गाँवे चलीं जा
चरे हरियरी गाँवे चलीं जा ...॥
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चुअत बा विश्वास के पेनी

चुअत बा विश्वास के पेनी, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं
बात खाली बतिया ना देलीं, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं।

चोट हियरा के चहुँपेला त नीर नयना में आ जाला
दिल बेचारा का करी बेधते बस बान समा जाला
कवन बात के बदला लेलीं, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं
चुअत बा विश्वास के पेनी, तुहूँ सोतऽ हमहूँ सोचीं।

एतने बात जेहन दिअवलीं मानवता के सोचल जाव
बैर भाव कांट कुश ह जिनगी के राह से नोचल जाव
कवन गलती हम कह देलीं, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं
चुअत बा विश्वास के पेनी, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं।

दिल देयानत गन्हा जाला त ना अदिमीयत रह जाला
दरक भरोसा के तल जाला त डूभी के जल बह जाला
अबो रूको लोहा के छेनी, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं
चुअत बा विश्वास के पेनी, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं।

बड़ छोट ना आदमी होखेला धन दौलत बढ़ला से
आदमी के चरित चमकेला गुन चरित के गढ़ला से
रिसे जन विश्वास के पेनी, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं
चुअत बा विश्वास के पेनी, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं।
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जंग जमीन के

माई बहिन के दीया बाती
बर रहल बा देश के खाती।

एह हुलस से सिखऽ कुछ
मत अपत तूँ लिखऽ कुछ।

बिनल नात फाँकल जइबऽ
कहवाँ जाके गाल बजइबऽ।

शेर बडुए़ आ फेर झकझोरी
पढ़के कलमा फेंकिहऽ तोरी।

पोसऽ आतंकवादी के पोसऽ
ना बुझलऽ अबो अफसोसऽ।

घीव के दीया जरे कतार में
शक्ति आइल बा औजार में।

ललसा बोले माई बहिन के
आवऽ लड़ ल जंग जमीन के।
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नयन के दोना ढरकल आवता

नयन के दोना ढरकल आवता।

कले कले चाँन घसकल आवता
दर्द जात नइखे कसकल आवता।

हवा जले जनले बा अकेले बानी
असुर के जात चसकल आवता।

फाग में रहल ना हँसे के अचिको
उनुका पर मन लहकल आवता।

सी के चीर जीए के मन ह केकर
छाती दबलो पर दरकल आवता।

बेदना में विद्या का कह सकेलन
नयन के दोना ढरकल आवता।
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टिकुलिया रे तोर जोतिया बा सोना

सँवरिया के दिहल ह सेनुरवा के दोना
टिकुलिया रे तोर जोतिया बा सोना।

मड़वा में फेरा परल अगिनिया के लेके
हथवा में हथवा बचनिया के देके
हिया में समाइल जाता प्रितिया के चोन्हा। टिकुलिया...

अँखिया लागे तऽ भोरे में सुगबुगाला
दरपन के सोझा भइला पऽ ई बुझाला
जगह देले बउए अँखिया-अँखिया के कोना। टिकुलिया...

मनवा नू मनवा में बतिया नू होला
तरे-तरे अगराला नित मिले ओला
मोतिया के दनवा बउए धगवा पिरोना। टिकुलिया...

कगवा अँगनवा में बोलेला मुड़ेर पर
आवेलन सजनवा रे गाँव के डँड़ेर पर
रहिया बटोहिया में उन्हुका बाटे होना। टिकुलिया..
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पियवा के

रामा पतरी कलइया में हरी हरी चुरिया हो रामा,
पियवा के, चुरिया सबदिया बोलावे हो रामा,
पियवा के, चुरिया सबदिया बोलावे हो रामा॥

रामा अल्हरऽ जवनिया में निंदिया आवे हो रामा,
पियवा के, उजग ना अँखिया बोलावे हो रामा,
पियवा के, उजग ना अँखिया बोलावे हो रामा॥

रामा रतिया चननिया चएनिया चोरावे हो रामा,
पियवा के, लागेला ओनिए ना भोरावे हो रामा,
पियवा के, लागेला ओनिए ना भोरावे हो रामा॥

रामा महुआ के बगिया महकिया लुटावे हो रामा,
पियवा के, गोड़वा ओनिए ना लपटावे हो रामा,
पियवा के, गोड़वा ओनिए ना लपटावे हो रामा॥
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मामा इमिली घोटावेलन

मामा ना इमिली घोटावेलन, लिहले हाथ में लोटनिया
बेचबऽ का मामा आज बोलऽ ना,
किया आपन तूँ भगिनिया .. ।

सब दिन रखलऽ हियरवा के तरे
आजू ना भगिनिया नैन लोर ढरे
बोलऽ ना मामा कुछ बचनिया, लिहले....।

माई कुहूँकत बाड़ी बोलत ना बाड़ी
केवड़ा फाँक के त भगिनिया हो ठाड़ी
रिश्ता के कइसन ई कहनिया, लिहले...।

तुलसी पुजाइल बाड़ी बीचे अँगनवा
शिव जी के पुजल गइल बैला वहनवा
सटत नइखे सोच में पपनिया, लिहले...।
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फूँकी दिहले गाँव

फूँकी दिहले गाँव केहू फूँकी दिहले घर बा
कइसे कहीं केकर छाती अइसन पत्थर बा

जुड़े जुड़े चलत रहे लोग गाँव आ घर के
साँझे बतियावत रहे हिल मिल जवर के
सुनुगे के आग इहाँ आखिर कवन जर बा।

आदमी त पनपत रहे आ पनपत अदिमियत
पाक साफ आदमी रहे आ पाक रहे नीयत
कांट कुश से बेशी अब आदमी के डर बा।

बोली से चिन्हाला नाहीं बोली से जनाला
काम तऽ ई घिनौना बाटे रोआँ गनगनाला
सनल सब लोहू से अखबार के खबर बा।

अइसन ना घिनौना काम होला शैतान के
कीमत ना लगावेला, इज्जत औरी जान के
मुँह बा ओकर सुरसा के अदिमी कवर बा।
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लेखक परिचयः
नाम: विद्या शंकर विद्यार्थी
C/o डॉ नंद किशोर तिवारी
निराला साहित्य मंदिर बिजली शहीद
सासाराम जिला रोहतास ( सासाराम )
बिहार - 221115
मो 0 न 0 7488674912









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