चुअत बा विश्वास के पेनी - विद्या शंकर विद्यार्थी

चुअत बा विश्वास के पेनी, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं
बात खाली बतिया ना देलीं, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं।

चोट हियरा के चहुँपेला त नीर नयना में आ जाला
दिल बेचारा का करी बेधते बस बान समा जाला
कवन बात के बदला लेलीं, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं
चुअत बा विश्वास के पेनी, तुहूँ सोतऽ हमहूँ सोचीं।

एतने बात जेहन दिअवलीं मानवता के सोचल जाव
बैर भाव कांट कुश ह जिनगी के राह से नोचल जाव
कवन गलती हम कह देलीं, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं
चुअत बा विश्वास के पेनी, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं।

दिल देयानत गन्हा जाला त ना अदिमीयत रह जाला
दरक भरोसा के तल जाला त डूभी के जल बह जाला
अबो रूको लोहा के छेनी, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं
चुअत बा विश्वास के पेनी, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं।

बड़ छोट ना आदमी होखेला धन दौलत बढ़ला से
आदमी के चरित चमकेला गुन चरित के गढ़ला से
रिसे जन विश्वास के पेनी, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं
चुअत बा विश्वास के पेनी, तुहूँ सोचऽ हमहूँ सोचीं।
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लेखक परिचयः
नाम: विद्या शंकर विद्यार्थी
C/o डॉ नंद किशोर तिवारी
निराला साहित्य मंदिर बिजली शहीद
सासाराम जिला रोहतास (सासाराम )
बिहार - 221115
मो. न.: 748867491

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