तीर बेधत निकलिये गइल - जवाहर लाल 'बेकस'

तीर बेधत निकलिये गइल,
जान अखडे़रे चलिये गइल।

आग ले दोस्ती का भइल,
घर फतिंगन के जरिये गइल।

आदमी, आदमी न रहल,
लोग अतना बदलिये गइल।

पी के गिरला ले का फायदा,
जब कि गिर के सम्हलिये गइल।

एह दुनिया के कोरहाग में,
जे भी आइल ऊ चलिये गइल।

ओह गजल के बसल इयाद में,
उम्र बेकस के ढलिये गइल।
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जवाहर लाल 'बेकस'

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