जब से सावन बा सुगबुगाइल - विद्या शंकर विद्यार्थी

जब से सावन बा सुगबुगाइल, तबे से हियरा तरसे ना
दूजे जोर घटा घेरी आइल,
घेरी-घेरी बदरा बरसे ना। तब...।

बानी अकसरूआ बानी दिन रात सोचतानी
नेहिया के लेके थाती दिन रात संकोचतानी
बिजुली चमकल जिया डेराइल। तब....।

कजरी नू गीतिया से सँइया के रिझइतीं रामा
अमवा के डढ़िया में झुलुहा ना लगइतीं रामा
पियवा आइल ना तन दुबराइल। तब....।

तलवा फफाइल भरी आइल नदी नलवा रामा
रिमझिम बुनिया में चुअता ना बंगलवा रामा
अँचरिया लोर से ऐने गोताइल। तब ....।

मिर्जापुरी गाजीपुरी हाजीपुरी कजरिया रामा
सब बासी परल बाटे कि पिया सहरिया रामा
किया पिया बा कहीं छेंकाइल। तब ....।
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लेखक परिचयः
नाम: विद्या शंकर विद्यार्थी
C/o डॉ नंद किशोर तिवारी
निराला साहित्य मंदिर बिजली शहीद
सासाराम जिला रोहतास (सासाराम )
बिहार - 221115
मो. न.: 7488674912

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