निशानी छुपवले जाता - गणेश नाथ तिवारी 'विनायक'

लोग बाप दादा के निशानी छुपवले जाता
आपन रोज नया नया कहानी बनवले जाता॥

लोक लाज हया सब ताखा पर रखले बा
झूठो के आँखिन से लोर पानी गिरवले जाता॥

रुपिया पइसा जर जोरू जमीन के लूटहाई
माई-बाप बेटन के बेइमानी सिखवले जाता॥

पहिले तs एकजुट रहत रहे काका पितिया सभे
अब तs लोग अकेले रहे के बानि लगवले जाता॥

पढाई-लिखाई,आदर-सत्कार सब भुला गइल लो
शुरुआती जिनगी के जरिये से जवानी बिगड़ले जाता॥

अपना आगे बढ़ला के कवनो चिंता फिकिर नइखे
भगेलुआ के आगे बढ़ल देखि दुश्मनी निभवले जाता॥

मनसरहंग,ढीठ,धूर्त भइल जाता दिन पर दिन लोगवा
बाबूजी भाई के कमाई पर फोटानी झरले जाता॥।
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गणेश नाथ तिवारी 'विनायक'

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