चमकी - अब्दुल ग़फ़्फ़ार

आंख मुड़ी में धंसल, गाल मूंह में, आ पेट पीठ में समाइल मुनिया के माई ओकरा के कोरा में ले के दू तीन गो अस्पताल छान मरली। बाकिर सगरी जगेह से एक्के गो जवाब मिलल कि अस्पताल में जगेह खाली नइखे।

दउड़त-दउड़त आखिर एगो अस्पताल के गेटे पर मुनिया के परान निकल गइल। मरला के बाद भी मुनिया आपन माई के ऐकटक ऐसे निहारत रहे जइसे कहत रहे की कउनो बात ना माई! तू तऽ हर जतन कइलू बाकिर ई सरकार आ समाज संवेदना शुन्य हो गइल बा, तू का कर सकऽताडू माई!

हार-पाछ के मुनिया के माई, मुनिया के मरल लास लेके घरे वापस आ गइली।

सारा सहर में हंगामा मचल रहे। कहीं स्वास्थ्य मंत्री आ मुख्यमंत्री के बोलावे के मांग होत रहे तऽ कहीं प्रधानमंत्री के बोलावे के हल्ला मचल रहे। ई सबसे बेसुध मुनिया के माई मुनिया के लास लेके जब घरे पहुंचली तऽ रोअन पीटन पड़ गइल।

गांव में आठ दिन में आठ गो लइका लइकनी काल के गाल में समा गइल रहे सन। सारा गाँव के लोग मुखिया जी के घेराइ कइले रहे।

बटेसर पूछलें, 'का मुखिया जी! प्रधानमंत्री आ मुख्यमंत्री के सभा में भीड़ लगावे खातिर तऽ हमनी के ले जानी। एह बेरा हमनी के बचवन के जान सांसत में बा; डाक्टर लोग से बेमारी नइखे पकड़ात। ओकनी के बचावे खातिर अब सरकार लोगिन के बोलाइं महराज!'

मुखिया जी कहे लगलन, 'अरे बुड़बक,डाक्टर लोग तऽ आपन काम करते नु बा। सरकार लोग के तऽ सगरी देस देखे के बा। इहाँ लास गिने आई लोग तऽ काम कइसे चली!'

ओही में खिसियाइल राम खेलावन कहलन, 'तऽ चुनव्वा के बेरा काहे आवे ला लोग महाराज!'

मुखिया जी समझावत कहलन, 'अब कौनो चुनाव बा का? ओह बेरा ओह लोग के गरज रहेला तऽ आवे ला लोग। चुनाव के पहिले तोहनी के राजा, आ चुनाव बाद हमनी के राजा। का समझलऽ लोगिन!'

बटेसर पूछलन, 'जे जीत गईल से राजा हो गइल, ई बात तऽ समझ में आवऽता, बाकिर जे हार गइल ऊहो तऽ मूंह देखावे नइखे आवत महाराज!'

मुखिया जी फेर समझावे के मूड में कहलन 'दुर बुड़बक! नेता माने नेताऽऽ! चाहे सत्ता पक्ष के होखे चाहे विपक्ष के, सभे बराबर होला। आ कौनो ऊ लोग के लइका लइकी थोड़े मरऽता जे धावे लोग। जेकरा मरे के बा, ऊ तऽ मरबे नु करीऽ। केहू भगवान थोड़े हऽ जे मरे वालन के जिनगी बचा ली!'

अबहिन ई बतकही होते रहे तब्बे बटेसर के बड़की बेटी दौड़त आइल अउरी कहलस, 'बाबू! जल्दी चलऽ बबलुआ के देह अईंठाइल जाता, आंख उलिट गईल बा, आ मूंह से गाज फेंकऽता।'

बटेसर आ राम खेलावन घर के ओर दौड़ल लोग आ मुखिया जी अस्पताल ले जाए खातिर आपन बुलेरो निकाले लगलन।

मुखिया जी, कौनो तरे बबलुआ के सरकारी अस्पताल में भर्ती करा दिहलन आ ऊंहा के हालत देख के बटेसर से कहलन, 'बटेसर, अब हम चलऽ तानी। बाप रे बाप! हई सैकड़ों लइकन के नाक में पाइप लगले बा, सुई दवाई होते बा, तब्बो ताबड़तोड़ लइका मरऽ ताने सन। हमसे बरदास नइखे होत। चक्कर आवऽता। बुझाता अब्बे गिर जाइब। हम चलऽतानी, अब तु संभालऽ आपन लइका के।

एतना कहके मुखिया जी आपन बुलेरो में जाके बइठ गइलन आ बटेसर बेड पर उल्टा सांस गिनत आपन बचवा के मूंह निहारे लगलन।
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अब्दुल ग़फ़्फ़ार

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