सहजोग करीं साहब: चमकी बोखार - तारकेश्वर राय 'तारक'

Encephalitis
आँख लोरा जाता बिहार के मुजफ्फरपुर कऽ हाल देखी के। चमकी बोखार से पीड़ित सैकड़न बच्चन के असमय मउवत के समाचार सुनला पढ़ला के बाद देंह में बेचैनी लेस लेले बा। काल के गाल में असमय समात देश के भावी नागरिक क जन्मदाता परिजन के रोवाई हाहाकार आ चीत्कार सुन के कवन अईसन निर्मोही होखी जेकरा जीवन के आमोद प्रमोद निक लागी। मजदूर के सम्मान अउरी किसान के भगवान बता के ओकर जय-जयकार कइल जाला समाज में। गरीबी आ भुख मरी से तड़पत, जांगर होखला के बादो शिक्षा-जागरुकता के कमी के चलते बेरोजगारी आ अउरी कुल समस्या के दशं झेलत अनगिनत लोग बा अपना समाज में। चमकी बोखार से भी सबसे अधिका ईहे तबका प्रभावित बा। जागरूकता के अभाव एह बेमारी के भयावह रूप में चहुँपा देहलस। 90 के दशक से प्रायः हर सलिये मई-जून के महिना में कमोबेश ई नजारा देखे के भेटा जाला।

सबसे अधिका वोट देवे वाला ईहे तबका हऽ, ओकरे वोट से हुक्मरान लोग चुनाला आ सता क सुख के साथ हुकूमत के ताकत भेटाला। जनता के सेवक क रूप में जाने जाए वाला नेताजी लोग के ई रूप चुनावे तक रहेला। जीतला के बाद के केकरा के पुछेला। चुनाव के समय गावँ में रोजे कवनो ना कवनो राजनीतिक दल के नुमाइंदा लोग अपना के सच्चा हितैषी जतावे ख़ातिर साथ मे भोजन करे के साथ ही साथ दुःख सुख में साथ निभावे के वादा कऽ बरीखा से भेवत नजर आवत रहे लोग। एह दुःख के घड़ी में केहु नजर नइखे आवत।

जवन भोपूं बजा बजा के चुनाव के समय कपार दुखवा देत रहे लोग, उहे लोग अगर एको हिस्सा के प्रयास जनता के जागरुक करे में लगवले रहीत त ई दिन ना देखे के पड़ित ।

खाली सरकार के दोष देहला से ई त्रासदी से पिण्ड ना छुटी कुछ काम अपनो के करे के परी । कुपोषण के शिकार बच्चा एह बीमारी में जल्दी धरा जालन। पानी के कमी न हो जाव शरीर मे ओकर खियाल खुदे करे के परी। कवनो मन्त्री नेता भा डॉक्टर ना अइहन चीनी ग्लूकोज के घोल पियावे पीड़ित बच्चन के ओकर साफ सफाई क धियान रखे।

मिडिया तऽ लोकतंत्र के चौथा स्तम्भ हऽ। जवन मुस्तैदी मीडिया कर्मी अब अस्पताल के डाक्टर के मुँह में माइक ठूँस के देखावत बाण उहे जागरूकता ई त्रासदी आवे ले पहिले भी देखावल जा सकते रहे। बचाव के उपाय कऽ जायजा लेके। सामान्य जानकारी से सैकड़ों बच्चन कऽ अनमोल जान के बचावल जा सकतऽ रहे।

चमकी बोखार से बचाव ख़ातिर जवन आदमी जागरूकता फैलावे में दिन रात लागल बाणन एक दिन खाली एक दिन उनकर भी साथ दिहिं न साहब! रवुवा लगे तऽ बड़का संसाधन बा! सतर्कता से एकरा से मुक्ति मिल सकतऽ बा। भोभा लगाके बताइ नऽ।

संवेदना के भंजा के आपन टी आर पी मत बढाई साहेब। सता पक्ष के विफलता देखावे ख़ातिर मुजफ्फरपुर के अस्पताल के आईसीयू में जाये के जरूरत नइखे उ तऽ रवुवा स्टूडियो में बइठ के भी पुरा देश के बता सकत बानी।

रवुवा अस्पताल अउरी डॉक्टर लोग के उनकर काम करे दिहीं। प्रशासन के लताड़ी उनकरा नाकामी पर। जागरूकता फईलावे में मदद करी। खाली बार नोचला से भार कम ना होखी। जागरुकता से ही बचाव सम्भव बा ओके फ़इलावे में सहयोग करीं। हमरा तऽ लगता, बचवन से अधिका बोखार तऽ सिस्टम के हो गइल बा। 17वी लोकसभा के गठन के बाद संविधान अउरी भगवान के किरिया खाये वाला सत्ता पक्ष के सांसद लोग के चुप्पी अउरी बिपक्ष के मौन दिल के कचोटता ये साहेब!
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Tarkeshwar Rai तारकेश्वर राय 'तारक' Encephalitisलेखक परिचय:-
नाम: तारकेश्वर राय 'तारक'
सम्प्रति: उप सम्पादक - सिरिजन (भोजपुरी) तिमाही ई-पत्रिका
गुरुग्राम: हरियाणा

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