आइल नया साल बा - सुरेश कांटक

कइसे कमाई खाई बड़ी बुरा हाल बा
केकरा खातिर ई आइल नया साल बा।

ओसही जिनिगिया के सपना बा टूटल
जारी बा सँचइया के मुड़िया के कूटल।

धरती बेहाल बा किसान फटेहाल बा
हतेया करत नेतवा त मालोमाल बा।

मेहनत पसेनवा रोवत बाटे भूखल
सगरो अन्हरिया में फूलवा बा सूखल।

रोटिया खोजत बा बबुअवा कबाड़ में
थर-थर काँपेला गरीबवा ए जाड़ में।

रोजी रोजगार बिना भटके नवहिया
घर वा बेगाना भइल सूखि गइल देहिया।

कइसे बुझाता कि आइल नया साल बा
जेने देखीं तेने सभकर बूरा हाल बा।
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लेखक परिचयः
नाम: सुरेश कांटक
ग्राम-पोस्ट: कांट
भाया: ब्रह्मपुर
जिला: बक्सर
बिहार - ८०२११२

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